चंडीगढ़ प्रशासन ने मानसून से पहले सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए महा-सफाई अभियान चलाया है। भारी मशीनों से अब तक करीब 34 हजार घनमीटर गाद निकालकर किनारों को सुरक्षित किया गया है।
चंडीगढ़। मानसून के आने से पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर की प्रसिद्ध सुखना झील को बचाने और संभावित जलभराव को रोकने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारी बारिश से निपटने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने झील में बड़े पैमाने पर Sukhna Lake Cleaning और डी-सिल्टिंग का महा-अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत अब तक करीब 34 हजार घनमीटर गाद को सफलतापूर्वक बाहर निकाला जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो बारिश शुरू होने तक यह सफाई कार्य लगातार जारी रहेगा। दरअसल साल 1988 से राष्ट्रीय वेटलैंड का दर्जा पा चुकी इस झील में भारी गाद जमा होने से इसकी जल भंडारण क्षमता लगातार कम हो रही थी। इसलिए इसे बचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम हो रहा है।

सुखना झील से निकाली गई गाद का शानदार उपयोग
विशेषज्ञों की सलाह पर झील के सूखे हुए हिस्सों में भारी मशीनों से खुदाई की जा रही है, जिसका 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। झील से निकाली जा रही इस हजारों घनमीटर मिट्टी को फेंका नहीं जा रहा है, बल्कि इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन इस गाद का उपयोग झील के किनारों और पैदल रास्तों को मजबूत बनाने में कर रहा है। इसके साथ ही वन विभाग ने सुखना चो की सफाई भी शुरू कर दी है। पानी के रास्ते से प्लास्टिक कचरा, जंगली झाड़ियां और खरपतवार हटाए जा रहे हैं, ताकि तेज बारिश होने पर पानी बिना किसी रुकावट के बह सके और मोहाली के बलटाना इलाके में बाढ़ का खतरा बिलकुल न रहे।

सुखना झील के विकास का पांच वर्षीय मास्टर प्लान
झील की खूबसूरती बढ़ाने और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए करीब दो लाख वर्गमीटर इलाके में विशेष अभियान चलाया गया है। इसके जरिए फालतू खरपतवार और अतिरिक्त कमल के पौधों को हटाया गया है, ताकि जलीय जीवों को एक साफ और सुरक्षित माहौल मिल सके। चंडीगढ़ प्रशासन ने झील के विकास, सोलर बोट्स को बढ़ावा देने और पर्यटकों की सुविधा के लिए पांच साल का एक इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है। इंजीनियरिंग विभाग के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि पिछले एक महीने से चल रहे इस डी-सिल्टिंग अभियान का मुख्य लक्ष्य लगभग पूरा हो गया है। अगर बारिश में देरी हुई तो मानसून से पहले और ज्यादा गाद निकालकर झील को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया जाएगा।

