सुप्रीम कोर्ट ने इंटर-कास्ट शादी करने वाले एक दंपती को बड़ी राहत दी है. राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें लड़की के माता-पिता को दंपती से मिलने की अनुमति दी गई थी. दंपती ने अदालत में कहा कि उसे ‘ऑनर किलिंग’ का डर है। इसलिए परिजनों को उनसे मिलने से रोका जाए. जस्टिस उज्ज्ल भुइयां और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने दंपति की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया.
झूठी शान के नाम पर हत्या की आशंका जता रहे इस जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है.
जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अरुण पल्ली की अदालत ने कहा कि हमें इस तरह की दकियानूसी सोच वाले लोगों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. वे उस जोड़े को मिलने के नाम पर परेशान कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दंपती की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने जोड़े से मिलने की हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई जुलाई के लिए तय कर दी.
हालांकि, लड़की के माता-पिता की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट का उद्देश्य केवल बेटी और उसके पिता के बीच मुलाकात सुनिश्चित करना था. ऐसा कोई इरादा नहीं है कि दी गयी सुरक्षा में कोई भी कमी या फिर रुकावट पैदा हो.
20 मार्च को शादी करने वाले इस जोड़े को डर था कि परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के हाथों उनकी “ऑनर किलिंग” हो सकती है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे अपनी जान बचाने के लिए लगातार दर-दर भटक रहे हैं और बागपत में पुरुष के माता-पिता के घर में नहीं रह पा रहे हैं.
दंपती के वकील ने शिकायत की कि राजस्थान पुलिस के जवान लगातार उनके घर के बाहर तैनात रहते हैं और उनके रिश्तेदारों के पास भी पहुंचते हैं, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी हो रही है.
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