दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश का इकलौता स्वर्ग और ‘क्वीन ऑफ सतपुड़ा’ कहा जाने वाला पचमढ़ी इन दिनों अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि कांक्रीट के अवैध मायाजाल के लिए सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट का सख्त डंडा है, प्रशासन का ‘नो न्यू कंस्ट्रक्शन’ का बोर्ड है, लेकिन साहब… पैसा बोलता है! कोर्ट के आदेशों को ठेंगे पर रखकर पचमढ़ी में इन दिनों अवैध निर्माण का खेल पूरी रफ्तार से ‘धड़ल्ले’ से चल रहा है। ​तस्वीरें और हालात गवाही दे रहे हैं कि कैसे नियमों की धज्जियां उड़ाकर इस खूबसूरत हिल स्टेशन को बर्बाद करने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।

​’सुधार’ का बहाना, ‘मंजिल पर मंजिल’ चढ़ाना!

दरअसल पचमढ़ी के होटल अमलतास में जो खेल चल रहा है, उसे देखकर आपकी आंखें फटी रह जाएंगी। जहां कभी पुराना ढांचा हुआ करता था, आज उसी पुराने निर्माण की आड़ में ‘अवैध’ का एक नया गढ़ खड़ा किया जा रहा है। जमीन खोदकर नए बीम और कॉलम खड़े कर दिए गए हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सीधी तौहीन है। ​जब इस बारे में निर्माण संभाल रहे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव और सब इंजीनियर महेश विश्वकर्मा से पूछा गया, तो उनका रटा-रटाया जवाब था “हुजूर, हम नया कुछ नहीं कर रहे, बस पुरानी बिल्डिंग का रिनोवेशन (सुधार) कर रहे हैं।” ​बड़ा सवाल लेकिन इंजीनियर्स साहब की इस ‘जादुई’ मरम्मत को क्या नाम दें, जहां पुरानी दीवार की आड़ में बिल्डिंग के ऊपर नई बिल्डिंगें तान दी जा रही हैं? ‘मरम्मत’ के नाम पर नया कंस्ट्रक्शन का यह खेल बिना ‘ऊपर’ की सांठगांठ के कैसे मुमकिन है?

​अधिकारी बोले- ‘हमें तो पता ही नहीं, अब करेंगे कार्रवाई!’

​इस पूरे मामले पर जब जिम्मेदार अधिकारियों को घेरा गया, तो उनके बयान भी कम दिलचस्प नहीं थे। ​आकिब खान एसडीएम, पिपरिया ने कहा गाइडलाइन के मुताबिक पचमढ़ी में कोई भी नया निर्माण नहीं हो सकता। आपसे जानकारी मिली है, अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं रखी नंदा फील्ड डायरेक्टर, एसटीआर ने कहा हमने साफ गाइडलाइन जारी की है।

नया निर्माण पूरी तरह बैन

लोग अपने घरों में सुधार कार्य तो कर सकते हैं, लेकिन व्यावसायिक (कमर्शियल) तौर पर नया निर्माण पूरी तरह बैन है। ​जनता का सवाल है साहब जब आपकी नाक के नीचे दिन-रात कंक्रीट मिक्सर चल रहे हैं, बीम खड़े हो रहे हैं, तब प्रशासन की आंखें क्यों बंद रहती हैं? क्या कार्रवाई के लिए हमेशा मीडिया के जगाने का इंतजार किया जाता है?

​पैसों की हवस ने छीनी पचमढ़ी की ‘ठंडक’, लग गई एसी की ‘आग’

​स्थानीय लोगों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। बुजुर्गों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि अधिक पैसा कमाने के लालच में पचमढ़ी की वादियों का गला घोंटा जा रहा है। होटलों और कमर्शियल बिल्डिंगों में वीआईपी सुविधाएं देने के लिए धड़ाधड़ एसी (AC) ठोके जा रहे हैं। इस समय पचमढ़ी में गर्मी की मिजाज की बात करें तो लगातार पारा बढ़ता जा रहा है जिसका कारण कंक्रीट और एसी बनते जा रहे है।

हिल स्टेशन का टैग छिन जाएगा

10 साल पीछे की बात करें तो पचमढ़ी की यह स्थिति थी कि इतनी भीषण गर्मी में लोग पंख तक का इस्तेमाल नहीं करते थे। स्थानीय लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा की अगर लालच का यह खेल ऐसे ही चलता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब पचमढ़ी का हिल स्टेशन का टैग छिन जाएगा। पर्यटक यहां आना बंद कर देंगे और जब सैलानी ही नहीं आएंगे, तो यहां के लोकल लोगों की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो जाएगी।”

​अब देखना बाकी है…

​इंजीनियरों की कागजी मरम्मत और रसूखदारों के पैसे के रसूख के आगे क्या प्रशासन वाकई कोई कड़ा एक्शन लेगा? या फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फाइलें इसी तरह पचमढ़ी की वादियों में उड़ती रहेंगी?

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