पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी में दखल देने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खूब फटकार लगाई है. उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है. बुधवार (22 अप्रैल, 2026) को ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. SC ने कहा कि एक मौजूदा सीएम जांच में दखल देंगी ऐसा सोचा नहीं था. संविधान विशेषज्ञों ने भी ऐसा नहीं सोचा था.

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के अधिकारियों के वकील से कहा कि किसी राज्य का सीएम रेड वाली जगह जाकर एजेंसी के काम में दखल दे रहा है और आप कह रहे हैं कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद का मामला है.

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को बंगाल IPAC छापेमारी केस की सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बड़ी सख्त टिप्पणी की. SC ने कहा कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही जांच में हस्तक्षेप करता है, तो इसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक मौजूदा सीएम जांच में दखल देंगी ऐसा सोचा नहीं था. संविधान विशेषज्ञों ने भी ऐसा नहीं सोचा था. एक तरह से ममता ने लोकतंत्र को खतरे में डाला है. सुप्रीम कोर्ट ने छापे के दौरान ममता के मौके पर पहुंचने पर उन्हें फटकार भी लगाई है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ईडी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. बंगाल के अधिकारियों की तरफ से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट से अपील की है कि ईडी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती है, ईडी कोई व्यक्ति नहीं है. एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने इसे केंद्र और राज्य के बीच विवाद का मामला बताया है.

उनकी दलीलों पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने असहमति जताई और कहा कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद का मामला नहीं है. किसी राज्य का मुख्यमंत्री इस तरह छापेमारी में दखल देता है और आप कहते हैं कि यह मूलरूप से राज्य और केंद्र सरकार के बीच विवाद का मामला है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आपत्तिजनक सामग्री भी ले जाई गई थी. तब न्यायमूर्ति कुमार ने डीजीपी की तरफ से पेश हुए वकील से कहा कि यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है. यह एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कृत्य है जो संयोगवश एक राज्य का मुख्यमंत्री है, और उसने पूरी व्यवस्था और पूरे लोकतंत्र को दांव पर लगा रखा है. किसी ने भी इस स्थिति की कल्पना नहीं की होगी कि इस देश में एक दिन ऐसा आएगा जब एक मौजूदा मुख्यमंत्री किसी अन्य एजेंसी के कार्यालय में जाएगा.

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