सूरत: ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सूरत में ‘सिग्नल स्कूल’ की शुरुआत की गई है। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं नालसा (NALSA) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस विक्रम नाथ ने इस विशेष सिग्नल स्कूल बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल भी मौजूद रहीं।
पहले चरण में 45 बच्चों का चयन
प्रोजेक्ट के पहले चरण में रांदेर ज़ोन के आसपास ट्रैफिक सिग्नल पर काम या भिक्षावृत्ति करने वाले 6 से 8 वर्ष के 45 बच्चों को चयनित (रेस्क्यू) किया गया है। शिक्षा समिति की विशेष रूप से तैयार की गई सिटी लिंक बस इन बच्चों को रोज़ाना उनके क्षेत्र से स्कूल लाएगी और पढ़ाई के बाद वापस उनके घर या क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ेगी।
मुफ्त सुविधाएं और मनपा स्कूलों में दाखिला
बच्चों के लिए अलग कक्षा और 5 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को मध्याह्न भोजन (Mid-day Meal), हेल्थ चेकअप, यूनिफॉर्म और शैक्षणिक सामग्री पूरी तरह नि:शुल्क दी जाएगी। ब्रिज कोर्स के जरिए बच्चों को बुनियादी शिक्षा देकर तैयार किया जाएगा, जिसके बाद उनका दाखिला पास के नगर निगम (मनपा) स्कूलों में कराया जाएगा। अभियान के तहत अब तक 650 से अधिक बच्चों को मनपा स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा चुका है।
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह सिर्फ एक बस नहीं, बल्कि बच्चों को उनके सपनों तक पहुंचाने वाला एक मजबूत पुल है। अहमदाबाद की तर्ज पर सूरत में भी इस प्रोजेक्ट के सफल होने की उम्मीद जताई गई है।
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