जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने के लिए इंटरनेट बंद करने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि शटडाउन के बाद छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए ब्लूटूथ ऐप BitChat का कोड भी सरकार हटवाना चाहती है।
चंडीगढ़। पेपर लीक और कथित भर्ती धांधली के खिलाफ छात्रों के आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार ने पहले इंटरनेट बंद किया, फिर सिग्नल जैमर लगाए, लेकिन जब छात्र बिना इंटरनेट के भी एक-दूसरे से जुड़े रहे तो अब कथित तौर पर BitChat ऐप के कोड को ही ब्लॉक कराने की कोशिश की गई।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार इंटरनेट बंद कर सकती है, सिग्नल जैमर लगा सकती है, लेकिन छात्रों के सवालों को नहीं रोक पा रही।
इंटरनेट बंद हुआ तो छात्रों ने Bluetooth से बनाया नेटवर्क
कांग्रेस नेता के मुताबिक, पेपर लीक और कथित धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और सिग्नल जैमर लगाए गए।

इसके बाद छात्रों ने इंटरनेट पर निर्भरता के बिना आपस में संपर्क बनाए रखने के लिए BitChat का इस्तेमाल शुरू किया। यह एक ब्लूटूथ आधारित मेश नेटवर्किंग ऐप है, जिसके जरिए आसपास मौजूद डिवाइस इंटरनेट के बिना भी आपस में संपर्क स्थापित कर सकते हैं।
सुरजेवाला ने दावा किया कि जब इंटरनेट बंद करने और जैमर लगाने के बावजूद छात्रों का आपसी संपर्क नहीं टूटा, तो सरकार ने कथित तौर पर इस डिजिटल माध्यम को भी रोकने का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया।
‘तीन घंटे में कोड हटाने का नोटिस दिया’
रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) ने आधी रात को GitHub को नोटिस जारी किया और BitChat के कोड को तीन घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार का तर्क यह था कि BitChat इंटरनेट शटडाउन के दौरान भी लोगों को संवाद करने की सुविधा देता है।
सुरजेवाला ने इसी आधार पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘जब इंटरनेट बंद करने के बाद भी छात्र आपस में संवाद करने लगे, तो सरकार अब उस तकनीक को भी रोकने में जुट गई, जिसके जरिए उनकी आवाज एक-दूसरे तक पहुंच रही थी।’
‘सरकार इंटरनेट के बाद Bluetooth से भी डर गई?’
कांग्रेस नेता ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पहले इंटरनेट बंद किया गया, फिर जैमर लगाए गए और जब छात्र Bluetooth के जरिए भी एक-दूसरे से जुड़े रहे तो कथित तौर पर BitChat के कोड को हटाने की कोशिश की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार की ताकत नहीं बल्कि छात्रों के आंदोलन और उनके सवालों से उसकी घबराहट को दर्शाता है।
सुरजेवाला ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को जवाब देने के बजाय सरकार संचार के हर रास्ते को बंद करने की कोशिश कर रही है।
जैक डॉर्सी के हवाले से डिजिटल सेंसरशिप का आरोप
सुरजेवाला ने दावा किया कि इस पूरे मामले का खुलासा Twitter के पूर्व संस्थापक जैक डॉर्सी ने वैश्विक स्तर पर किया है। कांग्रेस नेता ने इसे डिजिटल सेंसरशिप बताते हुए कहा कि सरकार अब केवल सड़कों पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से होने वाले संवाद को भी नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार पेपर लीक और कथित भर्ती घोटालों पर सवाल पूछने वाले युवाओं की आवाज को इंटरनेट बंद करके, जैमर लगाकर और अब कथित तौर पर कोडिंग प्लेटफॉर्म तक दबाना चाहती है?
‘पेपर लीक माफिया खुले, छात्रों की आवाज बंद’
रणदीप सुरजेवाला ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ‘पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार छात्रों की आवाज दबाने में अपनी पूरी ताकत लगा रही है।’
उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्रों के आंदोलन को रोकने के लिए इंटरनेट बंद किया जा रहा है और दूसरी तरफ कथित तौर पर ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की जा रही है, जो इंटरनेट के बिना भी लोगों को आपस में संवाद करने की सुविधा देते हैं।
कांग्रेस नेता ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि सरकार को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि उनकी आवाज दबाने के लिए संचार के रास्ते बंद करने चाहिए।
पेपर लीक विवाद के बीच सुरजेवाला के इन आरोपों ने राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे छात्रों की आवाज दबाने और डिजिटल सेंसरशिप का मामला बता रही है, वहीं अब इस पूरे विवाद पर केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।


