पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। लघु जल संसाधन विभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) हरेंद्र कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करने के बाद, जांच एजेंसी ने उनके चार ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ दबिश दी है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।
पटना से बांका और वैशाली तक विजिलेंस की रेड
विशेष निगरानी इकाई के अधिकारियों के अनुसार कार्यपालक अभियंता हरेंद्र कुमार वर्तमान में बांका जिले में पोस्टेड हैं। उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद 10 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से मामला दर्ज किया गया था। इसके ठीक अगले दिन, यानी 11 अगस्त को एसवीयू की अलग-अलग विशेष टीमों ने उनके ठिकानों को एक साथ खंगालना शुरू कर दिया।
चार ठिकानों पर छापेमारी की जा रही
बांका में उनके सरकारी आवास और आधिकारिक दफ्तर दोनों जगहों पर विजिलेंस की टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है।
राजधानी में उनके दो ठिकानों पर जांच एजेंसी ने एक साथ दबिश दी है, जहां चल-अचल संपत्ति का आकलन किया जा रहा है।
इसके अलावा वैशाली में जांच के दायरे में अन्य जुड़े संभावित ठिकाने भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में मिले जमीन के कागजात, वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
छापेमारी का नेतृत्व कर रहे जांच एजेंसी के अधिकारी अविनाश कुमार ने मीडिया को जानकारी दी है कि अब तक की तलाशी के दौरान जमीन से जुड़े 3 अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। हालांकि, अभी सर्च ऑपरेशन पूरी तरह जारी है और टीम इंजीनियर के बैंक खातों, लॉकरों, बीमा पॉलिसियों, निवेशों और अन्य वित्तीय लेन-देन का बारीक विश्लेषण कर रही है।
एसवीयू यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हरेंद्र कुमार की वैध आय के मुकाबले उनकी कुल संपत्ति और खर्च में कितना अंतर है। इस अंतर के आधार पर ही भ्रष्टाचार और अवैध कमाई के पैमाने तय किए जाएंगे।


