SC-ST और POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को मंगलवार को दोहरा झटका लगा। एक ओर निचली अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र डुडेजा की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद स्वतंत्र को तत्काल राहत मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है।

सोमवार को तत्काल सुनवाई पर बनी थी सहमति

इस मामले में सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दी थी। इसके बाद मामले को सुनवाई के लिए संबंधित बेंच के सामने रखा गया। दूसरी तरफ, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर की अदालत ने मारपीट के मामले में हिंदुत्ववादी ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। अदालत ने उनकी हिरासत अब 21 सितंबर तक बढ़ा दी है। भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया था।

स्वतंत्र भारद्वाज को एक दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट के आरोप में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद रविवार को उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था, जहां से उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायालय में हुई। अदालत ने पहले भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब उनकी न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी गई है।

कैसे गिरफ्तार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज

स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके वकील उमेश शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने अदालत से कहा कि भारद्वाज पिछले तीन दिन से हिरासत में हैं और याचिका को उसी दिन सूचीबद्ध किया जाए। दिल्ली पुलिस ने 5 जून को स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की एक घटना से जुड़े उनके वीडियो के सामने आने के बाद हुई। आरोप है कि CJP आंदोलन के दौरान भारद्वाज और एक दलित व्यक्ति के बीच मारपीट हुई थी। हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में भारद्वाज ने कथित तौर पर इस घटना का जिक्र करते हुए मारपीट की बात स्वीकार की थी। उन्होंने दावा किया था कि मारपीट में सामने वाले व्यक्ति के सिर पर चोट लगी थी और उसे टांके भी आए थे। उनके इस बयान के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया।

बयान के बाद बढ़ा विवाद

भारद्वाज के इस बयान के सामने आने के बाद CJP और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ SC-ST एक्ट और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद भारद्वाज को अदालत में पेश किया गया। निचली अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि उनकी ओर से गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई। हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी गई है।

पॉक्सो एक्ट में क्यों दर्ज हुआ केस

स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एक अलग शिकायत नाबालिग छात्रा की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को दर्ज शिकायत में ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी जोड़ी है। शिकायत के मुताबिक, नाबालिग ने पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे ऑनलाइन धमकियां दी गईं। आरोप है कि उसे आपत्तिजनक संदेश भेजे गए, अपशब्द कहे गए और उसकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें भेजा गया।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m