राकेश कथूरिया, कैथल। डीसी अपराजिता ने बताया कि जिले में भू-जल स्तर को सुधारने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेरा पानी-मेरी विरासत के तहत जिले में इस वर्ष 7200 एकड़ भूमि पर धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अधिक पानी की खपत वाली धान की खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाकर जल संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि किसान धान के स्थान पर मक्का, कपास, खरीफ दलहनी फसलें जैसे अरहर, मूंग, ग्वार, मोठ और उड़द, सोयाबीन, तिलहन फसलें जैसे तिल, अरंडी और मूंगफली, खरीफ प्याज, चारा फसलें, सब्जियों की खेती, खेत को खाली रखना तथा पॉपलर एवं सफेदा जैसे वृक्ष लगाने पर वाले किसानों को 8000 रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके अतिरिक्त दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 2000 रुपए प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा।

योजना के लाभ के लिए भौतिक सत्यापन अनिवार्य

उन्होंने बताया कि योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान संबंधित भूमि पर धान की खेती की हो। साथ ही पिछले वर्ष योजना का लाभ लेने वाले किसान यदि इस वर्ष भी वैकल्पिक फसलें अपनाते हैं तो वे भी योजना के लिए पात्र होंगे। योजना के लाभ के लिए भौतिक सत्यापन अनिवार्य रहेगा।

मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य

उन्होंने जानकारी दी कि योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण प्रक्रिया 18 मई 2026 से शुरू हो चुकी है। किसान समय रहते पंजीकरण करवाएं। अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा संबंधित कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) या उप-मंडल कृषि अधिकारी कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।