Business Desk – Tata Motors Strategy : पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता का असर अब भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. देश की जानी-मानी कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी, टाटा मोटर्स ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए, वह फिलहाल अपने खर्च और निवेश की योजनाओं को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपना रही है.

कंपनी के MD और CEO, गिरीश वाघ ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में आए संकट ने कई नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिसके चलते कंपनी को अपनी रणनीति और खर्च की योजनाओं पर फिर से विचार करना पड़ रहा है.
टाटा मोटर्स ने वित्त वर्ष 2027 के लिए तय किए गए अपने लगभग 3,000 करोड़ के पूंजीगत खर्च (Capex) के लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया है. गिरीश वाघ ने बताया कि हालांकि कंपनी अपनी मौजूदा निवेश योजना के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, लेकिन आने वाले समय में खर्च के समय में कुछ फेरबदल हो सकता है. उन्होंने समझाया कि आम तौर पर, कंपनी अपनी कुल कमाई का 2% से 4% हिस्सा Capex के लिए अलग रखती है.
गिरीश वाघ ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कंपनी को अपनी रणनीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. उनके मुताबिक, इस संघर्ष ने कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
कंपनी के कामकाज के तरीके में कुछ हद तक बदलाव आया है. उन्होंने आगे कहा कि इस युद्ध की वजह से कमोडिटी की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर दबाव और बढ़ गया है.
खरीदने से पहले सोच-विचार कर रहे हैं ग्राहक
कंपनी का मानना है कि जहां एक तरफ कमर्शियल वाहनों की बाजार में मांग अभी भी काफी अच्छी है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा अनिश्चित माहौल की वजह से ग्राहक कोई भी खरीदारी करने से पहले काफी सोच-विचार कर रहे हैं. इसके बावजूद, अपनी ज़रूरत को देखते हुए ग्राहक लगातार वाहन खरीद रहे हैं.
कंपनी डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चिंता मानती है. कंपनी के अनुसार, ईंधन की लागत खास तौर पर डीजल की कमर्शियल वाहनों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए कुल परिचालन लागत का 20% से 50% तक होती है.
नतीजतन, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से बाजार की मांग पर बुरा असर पड़ सकता है. इसके अलावा, कंपनी कमोडिटी की कीमतों के रुझान और मानसून के पैटर्न पर भी बारीकी से नज़र रख रही है.
FY27 में ग्रोथ की उम्मीद
इन चुनौतियों के बावजूद, Tata Motors को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 के दौरान घरेलू कमर्शियल वाहन इंडस्ट्री सिंगल-डिजिट ग्रोथ दर्ज करेगी. कंपनी का मानना है कि बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है और पिछले साल GST दरों में कटौती से जो तेज़ी आई थी, वह अभी भी जारी है.
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर Tata के एक्सपोर्ट बाजारों पर भी पड़ा है. गिरीश वाघ ने बताया कि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के बाजार प्रभावित हुए हैं. SAARC देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में भी चुनौतियां बढ़ गई हैं.
इनमें से श्रीलंका को ईंधन की कमी के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म होने के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में तेजी से सुधार आएगा.

