मुकेश मेहता, बुधनी। कार्तिकेय चौहान की नीलकंठ से शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नीलकंठ स्थित माध्यमिक शाला में करीब 95 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल का मैदान और प्रांगण बारिश के बाद कीचड़ से पूरी तरह सराबोर है। हालात ऐसे हैं कि बच्चे न ठीक से खेल पा रहे हैं और न ही प्रार्थना के समय व्यवस्थित तरीके से खड़े हो पा रहे हैं।

शिक्षिका के आंखों से छलक पड़े आंसू

स्कूल की शिक्षिका ने अपनी पीड़ा कार्तिकेय चौहान के सामने रखी। समस्या बताते-बताते शिक्षिका भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। शिक्षिका ने स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर मदद की गुहार लगाई। बताया गया कि स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते और परिसर में जगह-जगह कीचड़ होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल का खेल मैदान भी कीचड़ से भरा होने के कारण बच्चे खेल गतिविधियों से वंचित हैं।

सरपंच पर समस्या की अनदेखी के आरोप

शिक्षिका ने स्थानीय सरपंच पर भी स्कूल की मूलभूत समस्या की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। वहीं पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर 95 बच्चों के स्कूल की ऐसी स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी?

बच्चों की जिम्मेदारी किसकी?

एक ओर शासन-प्रशासन सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर नीलकंठ का यह स्कूल जमीनी हकीकत बयां करता नजर आ रहा है। बारिश के मौसम में यदि स्कूल का मैदान और प्रांगण कीचड़ से भर जाए और बच्चों को प्रार्थना तक के लिए उचित स्थान न मिले, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। अब देखना होगा कि शिक्षिका की गुहार के बाद जिम्मेदार पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल की समस्या का स्थायी समाधान कब तक करते हैं।

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