NEET UG 2026 Cancelled: नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने पटना में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा कि, छात्र और नौजवानों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बार-बार पेपर लीक जैसे वारदात सामने आ रहे हैं। सत्ता में जो लोग बैठे हैं ये लोग अपराधियों को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने कहा कि, कई शहरों और कई केंद्रों में परीक्षा रद्द कर दी गई है। कई नौजवानों और छात्रों का समय बर्बाद किया जा रहा है उनका उम्र निकल रहा है और बार-बार NEET पेपर लीक जैसे वारदात NDA की सरकार में लगातार हो रही हैं। करीब 20 लाख छात्रों के जीवन के साथ इस सरकार ने खिलवाड़ किया है।

22 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा

बता दें कि एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने पेपर लीक होने की वजह से 3 मई को आयोजित हुई नीट यूजी 2026 की परीक्षा को रद्द कर दिया है, जिसके बाद से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्य प्रणाली पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, देशभर में पेपर लीक मुद्दे को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। इस परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे।

पेपर लीक होने से छात्रों में नाराजगी

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर NEET की तैयारी कर रहे एक छात्र ने कहा कि, 2 साल की कड़ी मेहनत मेरी बर्बाद हो गई। हम NTA से नाराज हैं, क्योंकि पिछले दो साल पहले भी ऐसा ही हुआ था तो इसमें कोई सुधार नहीं हुआ और फिर से ऐसा हो गया और भविष्य में भी पेपर लीक की ऐसी घटनाएं फिर से हो सकती हैं। छात्र ने कहा कि, परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में आयोजित की जानी चाहिए। मुझे 650 से ज़्यादा अंकों की उम्मीद थी और मेरे माता-पिता को भी मुझसे बहुत उम्मीदें थीं। NTA को सुधार लाना चाहिए।

देश के लिए विषकाल बना तथाकथित अमृतकाल- राहुल

नीट परीक्षा रद्द होने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गई। 22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया। राहुल ने कहा कि, किसी पिता ने कर्ज़ लिया, किसी मां ने गहने बेचे, लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।

उन्होंने कहा कि, यह सिर्फ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है। हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं। अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे। अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुंच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा? प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।

ये भी पढ़ें- मनरेगा के नाम पर बड़ा घोटाला! अधिकारियों के बीच हुआ सरकारी पैसों का बंदरबांट, उप प्रमुख ने खोली पोल