कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में शिक्षा के मुद्दे पर जारी जुबानी जंग अब और भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के हालिया बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सत्ता पक्ष पर जोरदार निशाना साधा है। यह विवाद न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर केंद्रित है, बल्कि इसमें राजनीतिक बयानबाजी का तड़का भी शामिल हो गया है।
”पहले अपने खानदान को सरकारी स्कूल भेजिए”
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी द्वारा सरकारी स्कूलों में पढ़ने की नसीहत पर पलटवार करते हुए तेजस्वी यादव ने सीधा सवाल किया कि एनडीए नेताओं और मंत्रियों के परिवार में से कितने लोग वास्तव में सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकले हैं। तेजस्वी ने कहा, “सरकारी स्कूलों का मजाक उड़ाना बेहद गलत है। इसी शिक्षा व्यवस्था से निकलकर लोग आज IAS और IPS जैसे प्रतिष्ठित पदों पर अपनी सेवा दे रहे हैं।” उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों से निकले अधिकारियों की संख्या में अब कमी आई है, जो चिंता का विषय है। तेजस्वी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि लालू-राबड़ी शासनकाल में शिक्षा मंत्री के परिवार के सदस्य भी सरकारी संस्थानों में ही पढ़ा करते थे।
क्या था विवाद का कारण?
इस पूरे विवाद की जड़ शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का वह बयान है जिसमें उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा था कि तेजस्वी “एजिटेशन” (आंदोलन) शब्द को “एजुकेशन” (शिक्षा) समझ बैठे थे। मंत्री ने तंज भरे लहजे में यह भी कहा था कि वे शिक्षा मंत्री हैं, इसलिए तेजस्वी की मैट्रिक तक की पढ़ाई सुनिश्चित कराना अब उनकी जिम्मेदारी है। इसी टिप्पणी ने राजद और विपक्ष को सरकार पर आक्रामक होने का मौका दे दिया।
राजद का ‘पोस्टर वार’ और केंद्र पर हमला
शिक्षा के मुद्दे के अलावा, राजद ने केंद्र सरकार के खिलाफ पटना स्थित अपने कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर मोर्चा खोल दिया है। पोस्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों को निशाना बनाते हुए लिखा गया है, ‘देश की जनता त्रस्त, मोदी जी विदेश यात्रा में मस्त’।
राजद ने केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, सोने के भाव और पीएम की विदेश यात्राओं पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा है। राजद नेताओं का आरोप है कि बीजेपी-जेडीयू की सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए फिजूल की बयानबाजी कर रही है। बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के बीच की दूरी को साफ कर दिया है।

