आतंकवादी अक्सर हिंसा फैलाने या लोगों को भर्ती करने की कोशिश करते हैं। भारत में इस तरह की दहशतगर्दी फ़ैलाने का काम पाकिस्तान से आने वाले आतंकी करते है। लेकिन हाल ही में एक ऐसा आतंकी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगा है जोकि पाकिस्तान से भारत तो दहशत फैलाने के मकसद से आया था लेकिन यहां आकर वह अपना मकसद छोड़ किसी और समस्या को सुलझाने में ही लग गया। दरअसल, लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकवादी मोहम्मद उस्मान उर्फ चीनी, भारत में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने आया हुआ था, लेकिन कश्मीर के हालात और यहां की तकनीक देखकर उसका मन अपनी वर्षों पुरानी बालों की समस्या का इलाज ढूंढ़ने में निकल गया।

इसी क्रम में उसने श्रीनगर के एक क्लीनिक पर अपना हेयर ट्रांसप्लांट भी करवाया। इसके बाद वह सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ गया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चीनी’ को अप्रैल में श्रीनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान चीनी ने जो जानकारी दी उससे आतंकवादियों के एक बड़े मॉड्यूल का भांडा फोड़ हुआ है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों की जानकारी के अलावा चीनी ने अपने कुछ निजी राज भी खोले।

कहानी सुन सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़े

अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चीनी ने बताया कि पाकिस्तान में ट्रेनिंग के दौरान उसे जम्मू-कश्मीर के कुछ वीडियो दिखाए गए थे। जिसमें यहां मुसलमानों पर अत्याचार और हिंसा होते दिखाया गया था। लेकिन जब वह यहां आया, तो तस्वीर बिलकुल अलग थी। यहां के विकास को देखने के बाद उसने अपने कुछ निजी फायदे लेने की भी सोची। अधिकारियों के मुताबिक, चीनी अपने शुरुआती दिनों से ही बाल झड़ने की समस्या से पीड़ित था, जिसकी वजह से उसका आत्म विश्वास बुरी तरह से हिला हुआ था। उसे लगता था कि इसका इलाज केवल पश्चिमी देशों में ही संभव है। लेकिन कश्मीर के हालात देखने के बाद उसे बड़ा हैरान हुआ।

दुकानदार से हुई मुलाकात ने भुलाया मकसद

चीनी के मुताबिक, उसके एक अन्य पाकिस्तानी साथी आतंकवादी जरगाम ने उसकी मुलाकात जम्मू-कश्मीर के एक दुकानदार से करवाई थी। वह दुकानदार पहले से ही हेयर ट्रांसप्लांट करवाए हुए था। ऐसे में बाल लगवाने की उसकी वर्षों पुरानी इच्छा जाग गई।

जांचकर्ताओं के अनुसार, इसके बाद चीनी ने दुकानदार की सहायता से क्लीनिक तक पहुंच बनाई और फिर इसके बाद अपना हेयर ट्रांसप्लांट करवाया। इसके बाद वह श्रीनगर से जम्मू लौट गया। यहां पर उसने अपने काम को जारी रखा। लेकिन बाद में फर्जी पैनकार्ड और आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया के दौरान वह सुरक्षा कर्मियों के निशाने पर आ गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।