अरविंद मिश्रा, बलौदाबाजार। बीमा कंपनी द्वारा परिवादी को दुर्घटना बीमा क्षतिपूर्ति राशि देने में आनाकानी किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार ने अहम फैसला सुनाया है। विरोधी पक्षकार न्यू इंडिया जनरल इन्सुरेंस कंपनी अम्बेडकर चौक बलौदाबाजार को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी को दुर्घटना बीमा क्षतिपूर्ति राशि 2500000 रुपए एवं उपभोक्ता को मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 25000 रुपए तथा वाद-व्यय के लिए 7000 रुपए परिवादी को देने का आदेश दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार निवासी मेसर्स फ्रेंड्स फूड्स के प्रोपराइटर वेदप्रकाश पारवानी ने विरोधी पक्षकार से अपनी स्वामित्व के संस्थान मेसर्स फ्रेंड्स फूड्स का बीमा कराया था। उक्त संस्थान में बाढ़ का पानी घुसने से 2500000 की हानि हुई। परिवादी द्वारा विरोधी पक्षकार को घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद दावा क्लेम फॉर्म भरकर प्रस्तुत किया गया। सर्वेयर के बताए अनुसार सभी दस्तावेज विरोधी पक्षकार के पास जमा कर दिया गया, परंतु लगभग एक वर्ष से अधिक समय पश्चात् भी विरोधी पक्षकार द्वारा क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी गई। इससे परेशान होकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार में परिवाद प्रस्तुत किया।

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आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चांवला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन किया। जांच में पाया कि दुर्घटना की सूचना एवं जानकारी देने के पश्चात् भी विरोधी पक्षकार द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही या बीमा पालिसी के दावे के संबंध में नियमानुसार एवं प्रावधानुसार संबंधित क्षतिग्रस्त या घटना स्थल पर जाकर परिवादी द्वारा प्रस्तुत दावे बाबत सत्यता की जांच करने की कोई कार्यवाही किया जाना प्रकट नही है। ना ही विरोधी पक्षकार द्वारा नोटिस का कोई जवाब दिया गया है। यह उपभोक्ता संरक्षण अभियान का घोर उल्लंघन है। अतः विरोधी पक्षकार परिवादी को बीमा योजना के तहत दुर्घटना बीमा क्षतिपूर्ति राशि 2500000 रुपए एवं मानसिक आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 25000 तथा वाद-व्यय के लिए 7000 रुपए परिवादी को देने का आदेश दिया गया है।

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