अजय सैनी, भिवानी। स्थानीय विकास नगर स्थित श्री द्वारकाधीश मन्दिर में इन दिनों सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ की भव्य रसगंगा बह रही है। इस पावन कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य गोविन्द दास महाराज (अयोध्या/वृन्दावनवासी) ने अपनी सुमधुर वाणी से वृत्तासुर वध और पावन गजेन्द्र मोक्ष का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर पांडल में उपस्थित समस्त श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा व्यास पूज्य आचार्य गोविन्द दास महाराज ने दिव्य व्यासपीठ से वृत्तासुर वध की कथा का मर्म समझाते हुए कहा कि असुरता और अहंकार का अंत केवल ईश्वर की शरणागति से ही संभव है। इसके पश्चात, जब उन्होंने भागवत महापुराण के सबसे दिव्य प्रसंगों में से एक गजेन्द्र मोक्ष की कथा का शुभारंभ किया, तो संपूर्ण मन्दिर परिसर प्रभु के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

उन्होंने कहा कि हम सभी संसारी जीव इस गजेन्द्र (हाथी) के समान ही हैं, जो अज्ञानतावश केवल अपने परिवार, धन-संपत्ति और पुत्र-पुत्रादि के पालन-पोषण और मोह-माया के बंधन में फंसकर उस परमपिता परमेश्वर को भूल जाते हैं। जब विपत्ति का काल आता है और सांसारिक रिश्ते-नाते असमर्थ हो जाते हैं, तब केवल हरि का नाम ही जीव का उद्धार करता है।

आचार्य ने आगे समझाया कि जब दलदल में फंसे गजेन्द्र ने अपनी पूरी शक्ति हार जाने के बाद अत्यंत करुण भाव से एक कमल का पुष्प लेकर भगवान विष्णु को पुकारा, तब प्रभु ने नंगे पैर दौडक़र आकर उसका उद्धार किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि संकट चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि हम सच्चे मन से परमात्मा को पुकारेंगे, तो उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होगा।

इस अवसर पर राम निवास, नरेन्द्र, कृष्ण शर्मा, अरविन्द सिंह, मोनू शर्मा, पं0 प्रेम, दीपू शर्मा, सतीश, हरिपाल एवं सुमित्रा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रीमद् भागवत भगवान और व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य आचार्य का विधि-विधान से पूजन-अर्चन व आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मन्दिर समिति ने बताया कि कथा का समय प्रतिदिन सायंकाल 4 बजे से 7 बजे तक सुनिश्चित किया गया है।