दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में वर्षों से चर्चा का विषय रहे 33 शाम नाथ मार्ग की पहचान अब बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री आवास के तौर पर चुने गए इस बंगले को दिल्ली सरकार जल्द ही ध्वस्त कर इसके स्थान पर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है। लंबे समय से वीरान पड़े इस बंगले की जगह अब दिल्ली का पहला समर्पित दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) मुख्यालय बनाया जाएगा। सिविल लाइंस इलाके में स्थित यह बंगला लंबे समय तक दिल्ली की सत्ता से जुड़ा रहा है। हालांकि, समय के साथ यह पता राजनीतिक गलियारों में कथित तौर पर ‘मनहूस’ माने जाने लगा और कई वर्षों तक खाली पड़ा रहा। अब दिल्ली सरकार इस पुरानी छवि को बदलते हुए इसे आधुनिक आपदा प्रबंधन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
करीब 5000 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैले दो मंजिला बंगले को अब ध्वस्त कर यहां दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का नया मुख्यालय बनाया जाएगा। लंबे समय से वीरान पड़े इस बंगले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं और अंधविश्वास जुड़े रहे हैं। कई लोग इस बंगले को कथित तौर पर मनहूस और शापित मानते रहे हैं। यही वजह रही कि मुख्यमंत्री आवास के लिए चुने जाने के बावजूद यह लंबे समय तक खाली पड़ा रहा। अब दिल्ली सरकार ने इस जगह को आधुनिक आपदा प्रबंधन केंद्र में बदलने का फैसला किया है। सरकार की योजना यहां एक अत्याधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (EOC) बनाने की है। इस केंद्र के जरिए किसी भी बड़ी आपदा या आपात स्थिति के दौरान राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जाएगी। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और तुरंत फैसले लेने के लिए यहां आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्यों माना जाता है शापित?
दिल्ली का चर्चित 33 शाम नाथ मार्ग बंगला, जो 1920 के दशक में ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था, अब एक बार फिर सुर्खियों में है। यह ऐतिहासिक दो मंजिला बंगला अब ध्वस्त कर दिल्ली का पहला समर्पित आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) मुख्यालय और आधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (EOC) बनाने की तैयारी में है। सिविल लाइंस और विधानसभा क्षेत्र के पास स्थित यह बंगला अपने समय में बेहद भव्य माना जाता था। इसमें बड़े लॉन, कॉन्फ्रेंस रूम, विशाल बगीचे और स्टाफ क्वार्टर जैसी सुविधाएं मौजूद थीं। आजादी के बाद इसकी रणनीतिक लोकेशन को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के रूप में चुना गया।
समय के साथ जुड़ती गई अंधविश्वास की परतें
समय बीतने के साथ इस बंगले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की धारणाएं बनने लगीं। यहां रहने वाले मुख्यमंत्रियों के राजनीतिक जीवन में आए उतार-चढ़ाव को लोग इस जगह से जोड़ने लगे। धीरे-धीरे यह धारणा मजबूत होती गई और अंततः कई वर्षों तक कोई भी मुख्यमंत्री यहां रहने के लिए आगे नहीं आया। बाद के वर्षों में यह बंगला विभिन्न प्रशासनिक उपयोगों में रहा। यहां आखिरी प्रमुख सरकारी पदाधिकारी के रूप में जैस्मीन शाह कार्यरत रहे, जो दिल्ली डायलॉग कमीशन के वाइस-चेयरपर्सन थे। साल 2022 में उस समय विवाद खड़ा हुआ जब उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निर्देश देते हुए जैस्मीन शाह को उनके पद से हटाने के लिए कहा। उन पर अपने पद के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
क्यों किया जा रहा पुर्नविकसित
दिल्ली का ऐतिहासिक 33 शाम नाथ मार्ग बंगला, जिसे लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में अंधविश्वास और ‘मनहूस’ छवि से जोड़ा जाता रहा है, अब पूरी तरह नए रूप में सामने आने जा रहा है। दिल्ली सरकार इस जगह को ध्वस्त कर यहां दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का समर्पित मुख्यालय और आधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (EOC) बनाने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस फैसले को कई लोग पुराने अंधविश्वास को खत्म करने की पहल के रूप में देख रहे हैं, लेकिन इसके पीछे एक अहम प्रशासनिक वजह भी बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दिल्ली में DDMA का कोई अलग और समर्पित मुख्यालय नहीं है, जिसके कारण आपदा प्रबंधन से जुड़े काम अलग-अलग सरकारी दफ्तरों में बंटे रहते हैं।
अलग मुख्यालय की कमी बनी बड़ी चुनौती
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति जैसे बाढ़, भूकंप या आगजनी के दौरान तेजी से निर्णय लेने और एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने में मौजूदा व्यवस्था कई बार धीमी साबित होती है। अलग मुख्यालय न होने के कारण पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़ी इकाइयों को एक साथ लाना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को देखते हुए DDMA के लिए एक केंद्रीकृत और आधुनिक मुख्यालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रस्तावित DDMA मुख्यालय में एक अत्याधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (EOC) भी बनाया जाएगा, जहां रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और सभी एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय की व्यवस्था होगी। इससे आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को अधिक तेज और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
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