Business Desk – भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) आने जा रहा है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सहायक कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने अपने बहुप्रतीक्षित पब्लिक इश्यू के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है.

कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब 11,693 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है. यह इश्यू 14 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलेगा और बाजार में इसको लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है.
14 जुलाई से खुलेगा IPO, प्राइस बैंड 545 से 574 रुपए
SBI फंड्स मैनेजमेंट ने आईपीओ के लिए 545 रुपए से 574 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. प्राइस बैंड तय होने से पहले कंपनी के शेयर अनलिस्टेड मार्केट में करीब 830 रुपए प्रति शेयर के आसपास कारोबार कर रहे थे. 14 जुलाई से निवेशक इस इश्यू में आवेदन कर सकेंगे. प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का अनुमानित मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपए होगा, जिससे यह देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी.
IPO में नए शेयर नहीं होंगे, प्रमोटर्स बेचेंगे हिस्सेदारी
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित है. यानी कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी और आईपीओ से मिलने वाली राशि कंपनी के पास नहीं जाएगी. इसमें SBI अपनी 6.3 फीसदी हिस्सेदारी, यानी करीब 12.83 करोड़ शेयर, बेचेगा.
वहीं, कंपनी की जॉइंट वेंचर पार्टनर अमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी 3.7 फीसदी हिस्सेदारी, यानी करीब 7.56 करोड़ शेयर, बाजार में उतारेगी. फिलहाल SBI और अमुंडी के पास कंपनी की लगभग 98 फीसदी हिस्सेदारी है. अमुंडी को यह हिस्सेदारी वर्ष 2011 में सोसाइटी जेनेराल SA से ट्रांसफर की गई थी.
इस साल का पहला बिलियन डॉलर से बड़ा IPO
SBI फंड्स का यह इश्यू वर्ष 2026 का पहला ऐसा आईपीओ होगा, जिसका आकार एक बिलियन डॉलर से अधिक है. ऐसे में घरेलू और विदेशी निवेशकों की नजर इस इश्यू पर बनी हुई है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईपीओ भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है.
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी लॉन्चिंग तय
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद कई बड़ी कंपनियों ने अपने आईपीओ की तैयारी तेज की थी. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अस्थिरता बढ़ी और भारतीय शेयर बाजार में भी तेज गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स और निफ्टी में एक ही दिन में दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली, जो मार्च के बाद सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी गई. इसके बावजूद SBI फंड्स ने अपनी आईपीओ लॉन्चिंग की टाइमलाइन में कोई बदलाव नहीं किया है.
कंपनी बोली- बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन भरोसा कायम
SBI फंड्स मैनेजमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर देवाशीष मिश्रा का कहना है कि बाजार में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है, लेकिन कंपनी के बिजनेस मॉडल और निवेशकों के भरोसे पर इसका असर नहीं पड़ता. उनके मुताबिक, अगर बाजार की स्थिति इससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती, तब भी आईपीओ लॉन्च करने की योजना में बदलाव नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि लिस्टिंग के बाद कंपनी की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे म्यूचुअल फंड उद्योग को भी मजबूती मिलेगी.
देश का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर
SBI फंड्स मैनेजमेंट भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल है. कंपनी के पास 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) है. यह करीब 1.8 करोड़ यूनिक निवेशकों को सेवाएं देती है और 128 म्यूचुअल फंड स्कीम्स का संचालन करती है. देश में म्यूचुअल फंड निवेशकों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा फायदा भी कंपनी को मिल रहा है.
लगातार मजबूत हो रही कंपनी की कमाई
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 4,390 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,598 करोड़ रुपए की तुलना में 22 फीसदी अधिक है. इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 21 फीसदी बढ़कर 3,067 करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 2,540 करोड़ रुपए था. इससे पहले वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 2,691 करोड़ रुपए के रेवेन्यू पर 2,073 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया था. लगातार बढ़ती आय और मुनाफा कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है.
18 जुलाई को अलॉटमेंट, 21 जुलाई को शेयरों की लिस्टिंग
आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए 18 जुलाई को शेयर अलॉटमेंट फाइनल होने की संभावना है. इसके बाद 21 जुलाई को कंपनी के शेयर एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध होंगे.
जानिए क्या होता है रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP)
रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी RHP वह आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे कोई भी कंपनी आईपीओ लॉन्च करने से पहले बाजार नियामक के पास जमा करती है. इसमें कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रमोटर्स, जोखिम, आईपीओ का उद्देश्य और निवेशकों के लिए जरूरी सभी जानकारियां विस्तार से दी जाती हैं. यही दस्तावेज निवेशकों को किसी भी आईपीओ में निवेश का फैसला लेने में सबसे महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता.

