दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) ने चना खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ी पहल की है। अब उपार्जन केंद्रों पर किसानों से खरीदे जा रहे चने के बोरों (वारदाना) पर QR कोड टैग लगाए जा रहे हैं। इस डिजिटल तकनीक से न केवल उपज की हेराफेरी रुकेगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी पूरी तरह लगाम लगेगी।
बिना बोरी खोले ही फसल की गुणवत्ता और किस्म की पहचान
जब किसान केंद्र पर अपनी फसल लेकर आता है, तो एक रिसीव आईडी जनरेट होती है। इसके बाद किसान के चने की हर बोरी पर एक यूनिक QR टैग लगाया जाता है, जिसे थंब मशीन के माध्यम से किसान के डेटा से मर्ज कर दिया जाता है। गोदाम में माल पहुँचने के बाद भी अधिकारी जैसे ही टैग स्कैन करेंगे, उन्हें किसान का नाम, समिति की जानकारी और चने की वैरायटी (जैसे 202, 204 या देशी) का तुरंत पता चल जाएगा। बिना बोरी खोले ही फसल की गुणवत्ता और किस्म की पहचान संभव होगी।
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किसानों ने नवाचार का किया स्वागत
जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन के अनुसार पहले माल बदलने की शिकायतें आती थीं, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा। यदि गोदाम में QR टैग नहीं मिलता या वह स्कैन नहीं होता, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र के किसान संदीप गौर और सत्यनारायण चंदेल ने इस नवाचार का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे उनकी उपज की अलग पहचान बनी रहेगी और चने की वैरायटी के अनुसार सही रिकॉर्ड संधारित होगा।
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भविष्य में अन्य फसलों में लागू करने की मंशा
नर्मदापुरम जिले में कुल 22 केंद्र बनाए गए हैं। अब तक लगभग 642 किसान अपनी उपज बेच चुके हैं। कुल 23,100 क्विंटल चने का उपार्जन हो चुका है। खरीदी की प्रक्रिया 8 मार्च से 31 मई तक चलेगी। शासन की मंशा इस सफल प्रयोग के बाद भविष्य में अन्य फसलों के उपार्जन में भी इसी तकनीक को लागू करने की है।

