पश्चिम बंगाल के मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम गाने से जुड़े विवाद पर बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. राज्य मदरसा विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर राज्य के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया था. सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दत्ता ने इस कदम को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कहा कि आसमान नहीं गिर पड़ेगा.
कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर तय की है. पीआईएल दाखिल करने वाले की ओर से वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य पेश हुए.
पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा है. हालांकि, अदालत ने फिलहाल किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय की गई है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य का तर्क है कि कोई भी व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ स्वेच्छा से गा सकता है, लेकिन किसी को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करके वंदे मातरम् के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया है. अगर कोई अपनी मर्जी से गाना चाहता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन इसे थोपा नहीं जा सकता.
इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने की. कोर्ट ने कहा कि केंद्र का हलफनामा देखे बिना कोई अंतरिम आदेश जारी करना संभव नहीं है.
अदालत के सामने यह भी जानकारी आई कि दूसरी याचिका दायर होने के बाद राज्य मदरसा विभाग ने नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि सभी मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाया जाना चाहिए.
इस दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, “हजारों ईसाई स्कूलों में भी प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाया जाता है. क्या उससे आसमान गिर पड़ेगा?” जस्टिस ने कहा, “इस समय कोई अंतरिम आदेश जारी करना संभव नहीं है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


