Dharm Desk: कारोबार और दुकानदारी में जब मंदी आती है या काम रुकने लगता है, मन में पहला विचार यही आता है कि, पूजा-पाठ या कोई उपाय कर लिया जाए… सनातन धर्म में सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भक्ति और तरह-तरह के धार्मिक उपाय बताने की पुरानी परंपरा रही है, लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में अक्सर लोग ‘पूजा’ और ‘प्रयोग’ का अंतर नहीं समझ पाते। इसी वजह से कभी-कभी फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ जाता है। आइए सीधे और सरल शब्दों में समझते हैं कि व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए पूजा और प्रयोग कैसे काम करते हैं।

सात्विक पूजा: फल थोड़ा देर से, लेकिन फायदा पक्का मिलेगा

अपने इष्टदेव या देवी-देवता की सच्चे दिल से आराधना करना ही पूजा है। सात्विक पूजा का नियम बहुत सीधा है, इससे कभी किसी का बुरा या नुकसान नहीं होता। भले ही आपको इसका नतीजा तुरंत न दिखे और थोड़ा वक्त लग जाए, लेकिन इसका शुभ प्रभाव हमेशा बना रहता है । पूजा से कमाया गया पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता और सही समय आते ही कारोबार में पक्की और टिकाऊ तरक्की दिलाता है।

तंत्र और प्रयोग: तुरंत नतीजे, पर खतरा भी

रत्न पहनना, यंत्र की स्थापना, कोई टोटका करना या तांत्रिक क्रियाएं आजमाना ‘प्रयोग’ की श्रेणी में आते हैं। लोग प्रयोग इसलिए करते हैं ताकि उन्हें तुरंत परिणाम मिल सके । जहां सीधे-सादे सात्विक प्रयोग पूजा का ही एक हिस्सा हैं, वहीं तांत्रिक प्रयोगों में भारी जोखिम रहता है। तंत्र असल में उन चीज़ों को हासिल करने की कोशिश है जो आपकी किस्मत में नहीं लिखी है। इसलिए तांत्रिक प्रयोगों से अगर कुछ मिलता है, तो कुछ न कुछ गवाना भी पड़ सकता है।

कर्ज और परेशानियां: पूजा कैसे मदद करती है

पूजा या प्रयोग से रातों-रात दुख गायब नहीं हो जाते और न ही धन का ढेर लग जाता है। यह बस आपकी तकलीफ का तरीका बदल देती है। जैसे अगर सिर पर बड़ा कर्ज है, तो पूजा करने से कर्ज रातों-रात खत्म नहीं होगा, लेकिन आपको रास्ता जरूर मिल जागा, ऐसी व्यवस्था बन जाएगी कि आपको पैसे चुकाने के लिए सही समय और सहूलियत मिल जाए। जिससे आपका दिमागी तनाव कम हो सके।

संकेत पहचानना है सबसे जरूरी

कोई भी धार्मिक उपाय या प्रयोग करते वक्त इस बात पर नजर रखना बहुत जरूरी है कि उसका असर कैसा पड़ रहा है । अगर कोई प्रयोग शुरू करने के बाद घर-कारोबार में सब सही चले और अच्छे संकेत मिलें, तभी उसे जारी रखे, लेकिन अगर मन में अशांति बढ़े, नुकसान होने लगे या माहौल बिगड़े, तो उस प्रयोग को तुरंत वहीं रोक देना चाहिए।

किस्मत कोई नहीं बदल सकता, पर भक्ति बनती है ढाल

शास्त्रों में साफ कहा गया है कि कोई भी तंत्र या प्रयोग विधाता के लिखे भाग्य को बदल नहीं सकता । इसलिए भाग्य बदलने के झूठे दावे में कभी नहीं फंसना चाहिए, हालांकि, रोज की जाने वाली सात्विक पूजा एक रक्षा-कवच की तरह काम करती है। यह बुरे समय में व्यापारी को संभाले रखती है, और अनहोनी या बड़े नुकसान से बचाकर रखती है।

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