लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के तुएगोंदी गांव स्थित पाटेश्वर धाम में शनिवार को आदिवासी समाज द्वारा आयोजित पारंपरिक देव जातरा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। इस धार्मिक आयोजन में बालोद सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन ने करीब तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की थी।

देव जातरा के दौरान श्रद्धालुओं ने करीब चार किलोमीटर लंबे पथरीले और दुर्गम पहाड़ी मार्ग को पार कर पहाड़ी पर स्थित पाट बाबा और नीचे स्थित जलकैना में दर्शन-पूजन किया तथा परंपरा के अनुसार जीव सेवा की। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह उनके समाज का महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें वे अपने आराध्य देव आंगा देव के साथ पाट बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

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विवाद के बाद संवेदनशील माना जा रहा था आयोजन

यह आयोजन हाल ही में पाटेश्वर धाम को लेकर हुए विवाद के बाद विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा था। आदिवासी समाज ने बालक दास पर पाटेश्वर धाम की करीब 12 एकड़ वन भूमि पर कब्जा और अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जलकैना क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी। इस मुद्दे को लेकर कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन और हंगामा भी हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए बीते बुधवार को कलेक्टर, एसपी और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जलकैना से सटी बाउंड्री वॉल को छह जेसीबी मशीनों की मदद से हटाया था। साथ ही आदिवासी समाज, प्रशासन और मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बैठकों के बाद देव जातरा को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित कराने पर सहमति बनी।

एक पैर से दिव्यांग अनिल भी बाबा के दर्शन करन पहुंचे

आयोजन के दौरान एक पैर से दिव्यांग अनिल नेताम भी बैसाखी के सहारे करीब चार किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़कर पाट बाबा के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह उनके समाज का आस्था का पर्व है और वे पाट बाबा का आशीर्वाद लेने आए हैं। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में देव जातरा बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

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