रमेश सिन्हा, पिथौरा। बारनवापारा अभयारण्य में तीन चीतलों (हिरण) की मौत का मामला सामने आया है। वन विभाग के अनुसार, इनमें दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है, जबकि एक चीतल की मौत शिकार से होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बारनवापारा अभयारण्य के विस्थापित ग्राम रामपुर के पास स्थित रामपुर चारागाह कक्ष क्रमांक-127 में सोमवार और मंगलवार के दौरान तीन चीतल मृत अवस्था में मिले। इनमें एक चीतल की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। वन विभाग को आशंका है कि उसकी मौत शिकार के कारण हुई हो सकती है। हालांकि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उस पर किसी शिकारी ने हमला किया था या फिर आवारा कुत्तों के हमले से उसकी मौत हुई।

बहरहाल, घटना की सूचना मिलते ही अधीक्षक सहित वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। प्रथम दृष्टया मामला शिकार का प्रतीत होने पर विभाग इसके कारणों की जांच में जुट गया है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हिरण की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इसी स्थान पर दो अन्य चीतल भी मृत पाए गए, लेकिन घटनास्थल के निरीक्षण और चीतलों के शवों पर मिले चोट के निशानों से स्पष्ट हो चुका है कि दोनों चीतल आपसी संघर्ष में मारे गए हैं।
मृत चीतलों का किया गया दाह संस्कार
लगातार तीन चीतलों के शव मिलने के बाद वन विभाग ने पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर उनका विधिवत दाह संस्कार कर दिया।
रामपुर में चीतलों की सबसे अधिक संख्या : अधीक्षक
अभयारण्य के अधीक्षक कृष्णानु चंद्राकर ने तीन चीतलों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दो नर चीतलों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है। दोनों मृत चीतल नर थे। इनमें एक का सींग पास में मिला, जबकि दूसरे चीतल का सींग पहले चीतल की गर्दन में फंसा हुआ था। इससे स्पष्ट है कि संघर्ष के दौरान दोनों के सींग आपस में फंस गए थे। सींग निकालने के प्रयास में दोनों की गर्दन में गंभीर चोट लगी और अत्यधिक रक्तस्राव होने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि दोनों चीतलों की गर्दन की हड्डी भी टूट गई थी। घटनास्थल पर काफी मात्रा में खून मिला है। उन्होंने बताया कि रामपुर क्षेत्र के आसपास लगभग तीन हजार चीतल अक्सर दिखाई देते हैं।
समीप ही है काले हिरणों का रहवास
घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर खुले चरागाह में काले हिरणों का भी बसेरा है। यदि मृत तीसरे हिरण की मौत आवारा कुत्तों के हमले से हुई है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में आवारा कुत्ते भविष्य में काले हिरणों को भी अपना शिकार बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल अभयारण्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय वन्यजीव संपदा के लिए भी बड़ी क्षति होगी।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

