संबलपुर: पूरा संबलपुर शहर इस समय एक अनोखे उत्साह और भक्ति के रंग में डूबा हुआ है. आज रात देवों के देव महादेव, जगत जननी माता पार्वती के साथ विवाह बंधन में बंधने के लिए अपनी भव्य बारात लेकर निकलेंगे. इस अलौकिक पल का गवाह बनने और शिवजी की बारात में झूमने के लिए हजारों श्रद्धालु और लोक कलाकार पलकें बिछाए इंतजार कर रहे हैं. पूरे इलाके में ऐसा माहौल है, मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो.

इस महा-उत्सव की तैयारियां कितनी अनूठी होती हैं, इसकी बानगी बुधवार शाम को देखने को मिली. झाड़ूआपड़ा के प्रसिद्ध लोकनाथ बाबा मंदिर में पूजे जाने वाले ‘वीर हनुमान’ ने अपने प्रभु के विवाह का सारा जिम्मा खुद संभाला. परंपरा के अनुसार, भगवान हनुमान खुद विभिन्न मोहल्लों (झाड़ूआपड़ा, मुदीपड़ा, बड़बाजार और ठाकुरपड़ा) के लिए आमंत्रण पत्र लेकर निकले.
वे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अलग-अलग देवालयों में गए और ‘गुआगुंडा’ (सुपारी देकर न्योता देने की अनूठी परंपरा) के जरिए सभी देवी-देवताओं को इस दिव्य विवाह में शामिल होने का भक्तिपूर्ण आमंत्रण दिया. महाप्रभु हनुमान अपने साथ न्योते के रूप में सुपारी, मिठाई और अन्य मांगलिक सामग्रियां लेकर चल रहे थे.
संबलपुर के शीतल षष्ठी उत्सव में ‘गुआगुंडा’ परंपरा के तहत भगवान शिव के विवाह का न्योता देने के लिए सुपारी और मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है. जब हनुमान जी न्योता देने निकले, तो नजारा देखने लायक था. पारंपरिक ‘दुलदुली’ बाजे, घंटे, काहली और शंख की मिली-जुली आवाजों के बीच एक विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली गई.
प्रभु हनुमान ने ब्रह्मपुरा मंदिर, यज्ञवराह मंदिर, बंबराड़ बालुंकेश्वर बाबा मंदिर, गौर मठ, दधिवामन मंदिर, टिमनी गुड़ी, भागवत मंदिर और हुतापड़ा मंदिर तक का सफर तय किया और सभी देवी-देवताओं को आदरपूर्वक आमंत्रित किया. इसके साथ ही, इस अलौकिक देव-विवाह के मुख्य गवाह बनने के लिए झाड़ूआपाड़ा और ब्रह्मपुरा मंदिर के प्रभु गोपीनाथ जीउ को भी हनुमान जी ने विशेष रूप से आमंत्रित किया है.
पारंपरिक ‘गुआनिउता’ (न्योता देने का पर्व) संपन्न होने के बाद, अब पूरे संबलपुर के लोग घरों को सजाकर तैयार बैठे हैं. सबकी नजरें आज रात की उस मनमोहक घड़ी पर टिकी हैं, जब भूत-पिशाच, देवी-देवता और इंसानों की मौजूदगी में महादेव की अनोखी बारात निकलेगी और शिव-पार्वती का शुभ विवाह संपन्न होगा.

