Business Desk – Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बड़ी खबरें सामने आ रही हैं. वॉशिंगटन D.C. में चल रही बातचीत के ताजा दौर के बाद दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह समझौता अब अपने अंतिम चरण में है. ज्यादातर बड़े मुद्दे सुलझा लिए गए हैं.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन में मौजूद अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन बातचीत को बेहद “सकारात्मक और फलदायी” बताया है. नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ज्यादातर काम पूरा हो चुका है; अब बहुत कम मुद्दे ही सुलझाए जाने बाकी हैं.
वॉशिंगटन में उच्च-स्तरीय बैठकें हुईं
भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस समय वॉशिंगटन में है, जहाँ वे ‘ऑफिस ऑफ द U.S. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव’ (USTR) के अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं. अमेरिकी टीम का नेतृत्व दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं.
वहीं, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव, दर्पण जैन कर रहे हैं. इन बातचीत पर टिप्पणी करते हुए, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए “जीत-जीत” (win-win) वाली स्थिति होगी.
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते पर हुई प्रगति की पुष्टि की है. गोयल ने कहा कि समझौते का शुरुआती चरण लगभग पूरा हो चुका है. भारत का उद्देश्य अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अमेरिकी बाजार में बेहतर और “वरीयता प्राप्त” पहुँच हासिल करना है, जिससे भारतीय सामान वहाँ ज़्यादा किफायती और आसानी से उपलब्ध हो सकें.
समझौते की नींव 2025 में रखी गई थी
इस ऐतिहासिक समझौते की शुरुआत 13 फरवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत से हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य टैरिफ बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है. 7 फरवरी, 2026 को दोनों देशों के बीच एक अंतरिम रूपरेखा पर सहमति बनी थी, जिसने इस व्यापक समझौते का मार्ग प्रशस्त किया.
यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होगा. अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है. कपड़ा, इंजीनियरिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को इस नए समझौते से काफी फायदा हो सकता है. वैश्विक तनावों के बीच, भारत और अमेरिका का आर्थिक अभिसरण चीन जैसे देशों को एक मजबूत संदेश देता है.
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