रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से फोन पर बात कर मध्यस्ता की पेशकश की है। उन्होंने पुतिन के साथ लगभग 90 मिनट की बातचीत में यूक्रेन युद्ध का समाधान खोजने में मदद करने की पेशकश की है। इसी तरह की पेशकश जेलेंस्की को भी की गई है। तुर्की में होने वाले NATO सम्मेलन से पहले हुई इस चर्चा को अहम माना जा रहा है।

क्रेमलिन ने पुतिन के साथ ट्रंप की बातचीत की पुष्टि की

क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ लगभग 90 मिनट चर्चा की। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने उशाकोव के हवाले से कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वाभाविक रूप से यूक्रेनी समझौते के विषय पर चर्चा की, जिसमें 7-8 जुलाई को तुर्की में NATO शिखर सम्मेलन में ट्रंप की आगामी भागीदारी को भी ध्यान में रखा गया।” वहीं, पुतिन ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर ट्रंप को बधाई दी।

जेलेंस्की बोले- ट्रंप के साथ ‘बहुत अच्छी’ बातचीत हुई

जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ बातचीत को ‘बहुत अच्छा’ बताते हुए कहा कि उन्होंने और ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने मोर्चे पर मौजूदा स्थिति के साथ-साथ हमारे राजनयिक प्रयासों पर चर्चा की। इस युद्ध को समाप्त करने की पूरी संभावना है और अमेरिका का संकल्प दृढ़ है। हमने अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान इन चर्चाओं को जारी रखने पर सहमति जताई है।’

और किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

बातचीत के दौरान पुतिन ने जोर दिया कि रूस विवाद का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन इस शर्त पर कि रूस के सैद्धांतिक रुख का ध्यान रखा जाए। पुतिन ने उम्मीद जताई कि अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के आधार पर ऐसा दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सकता है, जो दोनों पक्षों को मंजूर हो। वहीं, जेलेंस्की ने बताया कि दोनों नेताओं ने सीमा पर हालात और कूटनीतिक कोशिशों पर विस्तार से बातचीत की।

तुर्की में होना है NATO शिखर सम्मेलन

तुर्की के अंकारा में 7-8 जुलाई को NATO शिखर सम्मेलन होना है। ट्रंप समेत कम से कम 32 देशों के राष्ट्राध्यक्ष इसमें हिस्सा लेंगे। ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, लेबनान और गाजा में युद्ध और ईंधन की कीमतों को देखते हुए ये सम्मेलन अहम है। हालांकि, बीते कुछ समय से जिस तरह ट्रंप ने NATO को निशाने पर लिया है, उसके चलते ज्यादा बड़े फैसले या सम्मेलन के असहज होने की भी संभावना है।

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