Trust takes years to build, seconds to break and forever to repair… विश्वास जीवन का क़ीमती ख़ज़ाना है. विश्वास और भरोसा न ख़रीदा जा सकता है और न ही किसी पर थोपा जा सकता है. वर्षों की सच्चाई, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार से बनता है अटूट विश्वास. लेकिन इस विराट हवेली को एक छोटी-सी भूल, थोड़ी सी लापरवाही या ज़रा सा छल पलभर में धराशायी कर सकता है. जिस विश्वास से आप स्वयं बहुत मज़बूत बने हुए होते हैं वही विश्वास अपने आप मे बहुत नाजुक और जटिल होता है. इसलिए समझाइश तो यही है कि “विश्वास बहुत क़ीमती है उसे उम्र भर संभाल के रखिए.”
परिवार में, दोस्ती में, दांपत्य में यहाँ तक अपने कार्यस्थल में भी हर रिश्ते और संबंध का आधार एक मज़बूत भरोसा और विश्वास ही होता है. विश्वास के पीछे-पीछे चलता है अपनापन, सम्मान और सुरक्षा का भाव. इसके उलट अविश्वास मन को संदेह, दूरी और टूटन देने का काम करता है. एक बार का टूटा हुआ विश्वास लंबे अंतराल के बाद भी जुड़ने का आभास तो दिला सकता है मगर सच तो यह है कि रिश्ते मे एक गहरी दरार रह जाती है. अपने विश्वास को बनाए रखना बहुत श्रम साध्य काम नहीं है बस झूठ से परहेज़ कीजिए, दिया हुआ वचन सही समय पर निभाइए और अपने कर्मों में पारदर्शिता बनाए रखिए . ज़ुबान से निकले शब्द और व्यवहार में रखी गई एकरूपता हमें दूसरों के हृदय में स्थायी स्थान दिलाती है. विश्वास परस्पर लेने और देने वाली भावना का नाम है सीधा सा फंडा है विश्वास चाहिए तो विश्वासपात्र बनिए.
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः.
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥
श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का अर्थ है कि श्रेष्ठ या ज्ञानी पुरुष जैसा आचरण करते हैं, आम जन उनका ही अनुकरण करते हैं. इसलिए ऐसे आचरण को अपनाया जाना चाहिए कि हमारा व्यक्तित्व ही विश्वास की पहचान बन जाए. बहुत कड़वी सच्चाई है धन, पद और प्रसिद्धि फिर से पाई भी जा सकती है मगर एक बार का खोया हुआ विश्वास वापस पाने में कभी-कभी एक उम्र कम पड़ जाती है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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