शब्बीर अहमद, भोपाल। Twisha Suicide Case: ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई को आरोपी पति समर्थ सिंह की रिमांड मिल गई है। समर्थ को आज कोर्ट में पेश किया गया। SIT की टीम उसे लेकर न्यायालय पहुंची और सीबीआई के सुपुर्द कर दिया। 

आकांक्षा कुमार की कोर्ट में समर्थ सिंह को किया पेश

पुलिस की टीम आरोपी समर्थ सिंह को कटारा हिल्स थाने से लेकर निकली। उसे एम्स अस्पताल लाया गया जहां उसका मेडिकल हुआ। मेडिकल के बाद भोपाल कोर्ट में समर्थ उसे पेश किया। न्याय सेवा सदन में जेएमएफसी आकांक्षा कुमार उचाड़िया के कोर्ट में समर्थ को पेश किया गया। जहां एसआईटी ने उसे CBI के सुपुर्द कर दिया। अब सीबीआई उससे पूछताछ करेगी।

गिरिबाला सिंह के अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई जारी

कुमार इंदर, जबलपुर। ट्विशा शर्मा की आत्महत्या के मामले में उसकी सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है। ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर पर चर्चा हुई। पीड़िता के वकील ने निचली अदालत की कमियां गिनवाई। ट्विशा के वकील ने कहा कि अपराध की गंभीरता को नहीं समझा। केस डायरी को ठीक से नहीं देखा गया। घटना के बाद परिजनों को जानकारी नहीं दी गई। 

एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने ट्विशा शर्मा की ओर से पक्ष रखा। ट्विशा के वकील ने पूर्व जज और पति समर्थ सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप चैट को निचली अदालत ने इग्नोर किया। शादी के 7 साल के अंदर मौत तो दहेज प्रताड़ना का मामला क्यों दर्ज नहीं हुआ? कोर्ट को जमानत देने के पहले सभी पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को रद्द किया था। केस डायरी पर सही ध्यान दिया जाता तो अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

उन्होंने आगे कहा कि बेल एप्लीकेशन में आरोपियों के दिए तथ्य दिया गए कोर्ट ने उन पर ही भरोसा किया। दोनों के बीच बातचीत के चैट भी कोर्ट में पेश किए गए। जांच शुरू होने से पहले जमानत लगा दी गई। सुनवाई के दौरान ट्विशा का चैट कोर्ट में पेश किया गया। हर तरह के घटिया आरोप और बातें। मुझे दर्द हो रहा है तो कहता है नाटक करती है। एक चैट में लिखा है- अम्मा नहीं सुन रही। मेरे लिए इनके दिल में कोई दया नहीं, सिर्फ लेबर क्लास को दया दिखाती हैं। पापा से नाक रगड़वाकर माफी मंगवाना चाहता है। घटना के तीन दिन पहले उसने कहा था- मुझे लेने आ जाओ… plz”

मामले में महाधिवक्ता ने कहा, 17 फरवरी को पहली बार पता चला कि मृतिका प्रेग्नेंट थी। ट्विशा के प्रेग्नेंट होने पर सवाल खड़े किए गए, उससे पूछा गया बच्चा किसका था? महाधिवक्ता ने भी कोर्ट के सामने चैट का उल्लेख किया गया। 12 मई को 10:25 पर हादसा हुआ। 13 मई को सुबह 9:40 बजे पुलिस पहुंची। अगर वह सुबह पहुंच जाती तो बिना FIR के उन्होंने वहां पर क्या सीज किया?

इस दौरान महाधिवक्ता की दलील थी कि ट्विशा शर्मा के शरीर में कई जगह चोट के निशान थे। सीधे हाथ की उंगली में भी चोट के निशान मिले। ट्विशा शर्मा के एल्बो में भी चोट के निशान थे। पीएम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्विशा की मौत के पहले ही चोट के निशान थे। पर्याप्त सुबूत होने के बाद भी ट्रायल कोर्ट से जमानत कैसे दी गई? जिला अदालत ने ऐसी सुनवाई की जैसे मिनी ट्रायल हो। निचली अदालत में चैट पर भरोसा किया गया। अग्रिम जमानत आदेश में ही मान लिया गया कि गिरिबाला 2 लाख रुपये दहेज नहीं मांग सकती। 

प्रशांत सिंह ने कहा कि कोर्ट का आदेश इस तरह का है कि जैसे इसे मेरिट पर सुना गया हो। CCTV की सेलेक्टिव क्लिप सर्कुलेट कर गिरिबाला के परिवार ने मीडिया में नैरेटिव सेट करने की कोशिश की जबकि वह फुटेज विवेचना का हिस्सा है। इसके साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, यह सभी अग्रिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन है। 

गिरीबाला के वकील नित्य रामकृष्ण ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हादसे के 20 मिनट के बाद ट्विशा को भोपाल के एम्स पहुंचा दिया गया। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह दोनों मौजूद थे। अगर अधिकारियों को कोई पूछताछ करनी थी तो दोनों वहां पर मौजूद थे। यह कहना गलत है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। गिरीबाला सिंह को नोटिस मिलने की बात को खारिज किया। गिरीबाला सिंह को सरकार का नोटिस मिलने का दावा झूठा है। 

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कोई पूछताछ करनी थी तो गिरिबाला और समर्थ दोनों मौजूद थे। इसलिए सहयोग न करने की बात गलत है। पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला के वहां मौजूद होने से इनकार किया। AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार बॉडी को पिता नवनिधि शर्मा ने आइडेंटिफाई किया। सरकार ने जो आरोप लगाया था कि घटनास्थल गिरिबाला के कब्जे में है उसका विरोध जताते हुए उन्होंने बताया कि 13 तारीख की सुबह से ही पुलिस ने वहां पर पहुंचकर जो चीज जब्त करनी थी वह जब्त कर ली और जहां पर ताले लगने थे वहां ताले भी लगा दिए तो घटनास्थल उनके कब्जे में नहीं है। 

सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि गिरिबाला सिंह को जिन आधार पर जमानत दी गई, उस तर्ज पर 90% लोगों को जमानत मिल जाएगी। FIR के पहले जमानत देने का क्या मतलब था? ट्रायल कोर्ट में केस डायरी भी ठीक से नहीं देखी गई। गिरीबाला सिंह ने कानून की जानकार होने का फायदा  उठाया। उन्हें पता था कि महिला से शाम को पूछताछ नहीं की जा सकती। इसलिए गिरिबाला सिंह ने शाम को SHO को मेल और व्हाट्सप मैसेज किया।

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