संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को राजधानी भोपाल की प्रशासन अकादमी में UCC ड्राफ्टिंग कमेटी की एक अहम और मैराथन बैठक हुई। इस बैठक में समाज के विभिन्न आयोगों, विभागीय अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया। हालांकि बैठक में आदिवासियों को छूट देने, लिव-इन रिलेशनशिप और महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर अलग-अलग वर्गों की राय में बड़ा टकराव देखने को मिला।
ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने रखीं अहम बातें
UCC ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष और उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि वेबसाइट पर जनता से लाखों सुझाव मिले हैं। उन्होंने आदिवासी समुदाय को लेकर आए 4 मुख्य विचारों को सामने रखा:
- आदिवासियों को UCC से पूरी तरह बाहर रखा जाए।
- उन्हें भी इसके अंतर्गत लाया जाए।
- सिर्फ शादी-विवाह के पंजीकरण जैसे मामलों के लिए इसे लागू किया जाए।
- आदिवासियों के लिए यह कानून पूरी तरह ‘ऑप्शनल’ हो।
लिव-इन रिलेशनशिप पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दो वयस्कों का साथ रहना उनका व्यक्तिगत निर्णय है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस संबंध से महिला और पैदा होने वाले बच्चे को क्या कानूनी अधिकार मिलने चाहिए।
पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर
भाजपा के प्रदेश महामंत्री ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा:
“हमने कई राज्यों के UCC मॉडल का अध्ययन कर मैरिज, डिवोर्स और बुजुर्गों-दिव्यांगों की सुरक्षा के विषय रखे हैं। विदेश भागने वाले धोखेबाज़ NRI दूल्हों पर भी नकेल कसी जाएगी। लेकिन जब देश के विकास की बात आती है तो विपक्ष चर्चा से भाग जाता है। बैठक से तमाम राजनीतिक दल गायब रहे।”
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने पलटवार करते हुए कहा:
“अगर आप आदिवासियों को उनकी परंपराओं के लिए अलग कर रहे हैं तो फिर यह ‘यूनिफॉर्म’ सिविल कोड कहां बचा? आप सिर्फ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्धों के लिए बाउंड्री तय कर रहे हैं, जो कि गलत है।”
हालांकि, कांग्रेस पार्टी के बैठक में शामिल न होने पर उन्होंने इसे पार्टी की ‘गंभीर चूक’ बताते हुए हाईकमान से बात करने की बात कही।
धर्मगुरुओं की राय: ‘लिव-इन’ पर एक सुर में विरोध, कानून पर अलग रास्ते
शहर काजी मौलाना मुश्ताक अली नदवी ने कहा:
“हमारा देश विविधताओं से भरा है। हमारे धर्म में बगैर निकाह किसी लड़की को देखना भी गुनाह है। इस कानून से सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा। जब आदिवासियों को बाहर रखा गया है तो हमें भी पर्सनल लॉ में बदलाव से बाहर रखा जाए। मध्य प्रदेश में इसकी जरूरत नहीं है।”
हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने कहा:
“हमें यूसीसी से कोई आपत्ति नहीं है, हम सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं लेकिन हमने लिव-इन रिलेशन पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। लिव-इन रिलेशन समान नागरिक संहिता को खंडित करेगा, इसे छोड़कर ही यूसीसी लागू होना चाहिए।”
क्रिश्चियन धर्मगुरु डॉ. ए.ए.एस. दुरईराज ने कहा कि:
“देश के लिए समान नागरिक संहिता जरूरी तो है लेकिन इसमें बहुत सारे धर्मों और जातियों के रीति-रिवाजों और अधिकारों का ध्यान रखने की बड़ी चुनौती है। आदिवासियों की भलाई और जमीन सुरक्षित रहनी चाहिए। रही बात लिव-इन रिलेशनशिप की तो यह हमारी संस्कृति और नियमों के लिहाज से बिल्कुल ठीक नहीं है।”

