पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदय सिंह (उर्फ पप्पू सिंह) ने सक्रिय राजनीति से एक वर्ष का विराम लेने की घोषणा की है। इस निर्णय से पार्टी के भीतर और राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

​निजी कारणों का दिया हवाला

​उदय सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे राजनीति से पूरी तरह संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि निजी कारणों से उन्होंने खुद को एक वर्ष के लिए सक्रिय राजनीति से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जीवन में कुछ ऐसे जरूरी मसले हैं, जिन पर उन्हें अपना पूर्ण ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस दौरान वे लोगों के लिए व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध रहेंगे।

​प्रशांत किशोर के आवास बदलने पर सफाई

​इस दौरान उदय सिंह ने जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर द्वारा हाल ही में ‘शेखपुरा हाउस’ खाली किए जाने की चर्चा पर भी विराम लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशांत किशोर ने केवल बेहतर सुविधाओं और स्थान की उपलब्धता के कारण आश्रम में शिफ्ट होने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया।

​एक नजर उदय सिंह का राजनीतिक सफर

​उदय सिंह बिहार के एक कद्दावर नेता और सफल उद्योगपति के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:

  • ​संसदीय पारी: उन्होंने 2004 और 2009 में भाजपा के टिकट पर पूर्णिया लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी।
  • ​पार्टी परिवर्तन: 2019 में भाजपा से मतभेद के बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए।
  • ​जन सुराज में भूमिका: लंबे समय तक मौन रहने के बाद, वे प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ अभियान से जुड़े और मई 2025 में पार्टी के गठन के साथ ही उन्हें पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया।

​उदय सिंह को बिहार के सबसे धनी राजनेताओं में गिना जाता है। वर्ष 2019 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी घोषित संपत्ति 370 करोड़ रुपये से अधिक थी। उनके इस ब्रेक को सीमांचल और पूर्णिया क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, जन सुराज पार्टी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है।