प्रदीप मालवीय, उज्जैन। पुलिस की जांच में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब सभी सुराग धुंधले पड़ने लगते हैं। ऐसे समय में एक बेजुबान साथी अपनी सूंघने की क्षमता के दम पर जांच को नई दिशा देता है। उज्जैन पुलिस का ट्रैकर डॉग ‘लकी’ ऐसा ही एक भरोसेमंद साथी है, जिसने कई अहम मामलों में पुलिस को अपराधियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने ‘लकी’ को 10 हजार रुपए के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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हाल ही में उन्हेंल हत्याकांड में लकी ने कुछ ही मिनटों में आरोपी तक पहुंचने में पुलिस की मदद की। इसके बाद नागदा हत्याकांड में भी घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर आरोपी के घर तक पहुंचकर जांच को सही दिशा दिखाई। इससे पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में बड़ी सफलता मिली ।

यह पहली बार नहीं है, जब लकी ने अपनी उपयोगिता साबित की हो। इससे पहले नरवर के चर्चित डबल मर्डर केस में भी उसकी भूमिका अहम रही थी। वहीं उज्जैन के विष्णु सागर तालाब में ढाई साल की मासूम बच्ची के गुम होने के मामले में भी लकी ने पुलिस को उस स्थान तक पहुंचाया, जहां बाद में बच्ची का शव बरामद हुआ।

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लकी के हैंडलर अखिलेश चंद्रवंशी के अनुसार, ट्रैकर डॉग बनने के लिए करीब एक वर्ष तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान गंध पहचानना, ट्रैकिंग, दौड़, अनुशासन और अपराधी तक पहुंचने जैसी कई महत्वपूर्ण चीजों का अभ्यास कराया जाता है। ड्यूटी के दौरान लकी हर समय तैयार रहता है और सूचना मिलते ही टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो जाता है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ट्रैकर डॉग किसी भी जांच में निष्पक्ष तरीके से काम करता है। कई बार जब अन्य सुराग कम पड़ जाते हैं, तब उसकी सूंघने की क्षमता जांच को सही दिशा देने में मदद करती है। यही वजह है कि आज ‘लकी’ सिर्फ एक पुलिस डॉग नहीं, बल्कि उज्जैन पुलिस की जांच टीम का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है।

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