देहरादून. युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने मेरा युवा भारत (एमवाई भारत) के माध्यम से विकसित जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वीवीवीपी) 2026 के पहले चरण का शुभारंभ किया है. यह एक अग्रणी युवा नेतृत्व वाली पहल है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर भागीदारी को सुदृढ़ करना, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और भारत के सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है. यह कार्यक्रम दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा.

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इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुल 500 ‘एमवाई भारत’ स्वयंसेवकों का चयन किया गया है. इनका चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया था. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है. प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे.

यह कार्यक्रम युवा नागरिकों को सीमावर्ती गांवों में रहने और स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है. गांववासियों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के साथ परस्पर बातचीत के माध्यम से, प्रतिभागी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, सांस्कृतिक विरासत, विकासात्मक आकांक्षाओं और रणनीतिक महत्व से प्रत्यक्ष रूप से परिचित होंगे.

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सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, शासन, सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, ग्राम विकास योजना, स्वयंसेवा और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयगत क्षेत्रों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है. स्वयंसेवक घरेलू सर्वेक्षण करेंगे, ग्राम सभा की गतिविधियों में भाग लेंगे, स्वच्छता और पर्यावरण अभियानों में योगदान देंगे और गांवों में विकास के अवसरों की पहचान करने में सहायता करेंगे.

इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का प्रचार-प्रसार है, जो एक राष्ट्रव्यापी अभियान है और ज़िम्मेदार नागरिकता एवं टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देता है. एमवाई भारत के स्वयंसेवक इस अभियान के पांच प्रमुख विषयगत क्षेत्रों : स्वदेशी उत्पादों का अंगीकरण, स्वस्थ खाना पकाने की विधियाँ, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और ईंधन संरक्षण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और स्थानीय पर्यटन के लिए मुखर समर्थन की सक्रिय रूप से सहायता करेंगे. सामुदायिक संपर्क और जागरुकता गतिविधियों के माध्यम से, प्रतिभागी स्थानीय समुदायों को इन राष्ट्र-केंद्रित और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.

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यह कार्यक्रम गृह मंत्रालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है और राष्ट्र निर्माण की पहलों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना के अनुरूप है.