देहरादून. इन दिनों महिला आरक्षण को लेकर देश में जमकर सियासत हो रही है. महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर विपक्षी दल भाजपा पर हमलावर हैं. पूर्व सीएम हरीश रावत ने निशाना साधते हुए कहा, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे..! देहरादून के समाचार धामी जी की धमकी से भरे पड़े हैं. धामी जी यह तो आपकी केंद्र सरकार थी, जिसने जानबूझकर महिला आरक्षण के प्रश्न को परिसीमन विधेयक के साथ जोड़ा. उन्हें स्पष्ट मालूम था कि तमिलनाडु सहित देश के 16 राज्यों की परिसीमन को लेकर अपनी-अपनी शंकाएं हैं, उत्तराखंड की भी शंका है. जानते-बूझते केंद्र सरकार ने बड़ी चालाकी से दोनों प्रश्नों को जोड़ा. केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू नहीं करना चाहती है. यदि वह चाहती तो वर्ष 2023 के बाद यह कदम उठा सकती थी.
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आगे हरीश रावत ने कहा, 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण बिल पास किया है. कांग्रेस ने तब भी कहा कि तत्काल लागू करो. 543 संसदीय क्षेत्रों में से एक तिहाई क्षेत्र महिलाओं के लिए आरक्षित किए जा सकते थे और यह भी किया जा सकता था कि देश के राज्यों में अनुपातिक तौर पर बांटकर 33% द्वि-प्रतिनिधि सीट निर्धारित की जा सकती थी, अर्थात एक तिहाई सीटों से पुरुष के साथ एक महिला भी निर्वाचित घोषित होगी. अपने बिल पास होने के बाद न जनगणना की, न आपने उपरोक्त दो विकल्पों में से किसी विकल्प को अपनाया! अब चुनाव आते देखकर महिलाओं से सवाल उठने लगे कि हमें आरक्षण कब मिलेगा? आरक्षण क्यों विलंब किया जा रहा है? सवालों से बचने के लिए नाटक नहीं, प्रपंच रचा गया. महिला आरक्षण को परिसीमन बिल के साथ जोड़ दिया गया.
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हम आज भी चुनौती दे रहे हैं. हिम्मत करो, लोकसभा की वर्तमान संख्या में से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करिए. साहस करिए, हम आपका साथ देंगे. कांग्रेस से सवाल करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह कांग्रेस थी, जिसने वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए सारे विपक्ष को सहमत करवाया और विधेयक पारित हुआ. वर्ष 2010 में भी कांग्रेस ने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के विधेयक को राज्यसभा में पारित करवाया. विधानसभा में भाजपा के प्रपंच के कारण परिस्थितियां बदल गईं. नहीं तो संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू हुए 15 वर्ष हो गए होते. ये कांग्रेस पार्टी के नेता राजीव गांधी थे, जिन्होंने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का शुभारंभ किया. यह कांग्रेस की सरकार थी, जिसके कार्यकाल में प्रथम चरण में पंचायतों और नगर पंचायतों में महिला, दलित और पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू हुआ. भाजपा ढोंग कर सकती है, स्वांग रच सकती है, मगर महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण देने का उनमें साहस नहीं है. यदि हिम्मत है तो हम साथ देंगे. वर्तमान संख्या के आधार पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करिए.
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