देहरादून. धामी सरकार ने हर जिले के 10 गावों में चकबंदी का ऐलान किया है. जिसे लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने करारा तंज कसा है. हरीश रावत ने कहा, सरकार का ऐलान कि प्रत्येक जिले के 10 गांवों में चकबंदी होगी. मगर खेती कह रही है कि बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते, हमारा तो दम ही उखड़ गया है, आपका पैगाम गांव तक पहुंचते-पहुंचते.
इसे भी पढ़ें- अब तक 12 लाख 60 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे चारधाम, जानिए सबसे अधिक कहां पहुंचे लोग
आगे हरीश रावत ने कहा, 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पर्वतीय चकबंदी का एक्ट पास करवाया था. सत्ता में भाजपा आई और हमें लगा कि जो एक्ट बनाने के लिए समिति बनाई गई थी, उसके चेयरमैन भी भाजपा में ही चले गए हैं तो भाजपा उस एक्ट को लागू करेगी. साढ़े नौ साल तक भाजपा को उस एक्ट की याद नहीं आई. एक्ट तो छोड़िए, चकबंदी की भी याद नहीं आई. अब चला-चली की बेला आई, तब चकबंदी-चकबंदी कह रहे हैं.
इसे भी पढ़ें- ‘प्रधानमंत्री की अपील केवल गैर-भाजपाई भारत के लिए है या उसमें सारा भारत सम्मिलित है?’
आगे उन्होंने कहा, खैर हम इतना मान लेते हैं कि कह तो रहे हो. कुछ रोडमैप आगे बढ़ाओ और निश्चित तौर पर हमारा सहयोग सरकार को मिलेगा. मगर प्रयास बीरबल की खिचड़ी नहीं होनी चाहिए. चूल्हा, हांडी आदि सब दिखाई देना चाहिए. आप चकबंदी का कार्यक्रम घोषित करिए और हो सके तो एक और पुण्य का काम करिए. 1961 के बाद उत्तराखंड में जमीनों की पैमाइश नहीं हुई है. भूमि बंदोबस्त नहीं हुआ है तो एक बार भूमि की पैमाइश करवा दीजिए. दिल से न चाहते हुए भी अच्छे आइडिया को जनहित में हम आपके सामने रख रहे हैं और दोनों मामलों में सहयोग का वादा कर रहे हैं.

