उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों को 'ड्रग-फ्री कैंपस' बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नई व्यवस्था के तहत प्रतिदिन दो मिनट की नशामुक्ति शपथ के साथ कार्यदिवस की शुरुआत होगी और परिसर के 500 मीटर दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
सतीश सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अब केवल पढ़ाई और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेंगे। योगी सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ बनाने के लिए व्यापक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। नई कार्ययोजना के तहत हर कार्यदिवस की शुरुआत छात्रों से दो मिनट की नशामुक्ति शपथ के साथ होगी, जबकि कैंपस के भीतर और बाहर निगरानी भी पहले से कहीं अधिक सख्त रहेगी।
जागरूकता के लिए विविध गतिविधियां
शुक्रवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में नशे के खिलाफ जनजागरूकता को नियमित गतिविधि बनाया जाएगा। इसके तहत ‘रन फॉर नशामुक्ति’, मैराथन, नुक्कड़ नाटक, भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए छात्रों को अभियान से जोड़ा जाएगा। हर शिक्षक सप्ताह में एक बार अपनी कक्षा के अंतिम 10 मिनट नशामुक्ति पर चर्चा के लिए भी निर्धारित करेगा।
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कैंपस सुरक्षा और जांच सख्त
सरकार ने केवल जागरूकता तक खुद को सीमित नहीं रखा है। कैंपस सुरक्षा को लेकर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। सभी शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ी निगरानी होगी। हॉस्टलों और कैंटीनों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा, जबकि ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर से आने वाले पार्सलों की भी प्रवेश द्वार पर जांच होगी, ताकि किसी भी माध्यम से नशीले पदार्थ परिसर तक न पहुंच सकें।
दंड नहीं, काउंसलिंग पर जोर
अभियान का एक अहम पहलू यह भी है कि नशे की प्रवृत्ति वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें दंडित करने के बजाय काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके अभिभावकों को बुलाकर संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि समय रहते उन्हें नशे की लत से बाहर निकाला जा सके।
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पांच जोन में होगी निगरानी
पूरे अभियान की निगरानी के लिए प्रदेश को पांच जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में वरिष्ठ अधिकारी नोडल होंगे, जबकि विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और संकाय स्तर पर अलग-अलग नोडल अधिकारी अभियान की प्रगति पर नजर रखेंगे।
योगी सरकार का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त वातावरण दिया जाए, तो युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी ढंग से लग सकेगी। यही सोच इस अभियान को केवल सरकारी निर्देश नहीं, बल्कि ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ से ‘ड्रग-फ्री उत्तर प्रदेश’ की दिशा में एक बड़े सामाजिक अभियान का रूप देने की कोशिश है।


