अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. जिले के धानापुर विकासखंड क्षेत्र के गुरैनी गांव में गुरुवार को चकबंदी प्रक्रिया और गंगा कटान के मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया. सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने गांव में विरोध मार्च निकालकर चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग उठाई. यह प्रदर्शन कम्युनिस्ट पार्टी (माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में आयोजित किया गया. प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग द्वारा जमीनों के रिकॉर्ड में फेरबदल कर गरीब किसानों की जमीनों की बंदरबांट की जा रही है.
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ग्रामीणों ने गंगा कटान से प्रभावित इलाकों का नाव के माध्यम से दौरा भी किया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार हो रहे कटान से किसानों की बड़ी संख्या में कृषि भूमि गंगा में समाहित हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, धानापुर विकासखंड के नौघरा, बूढ़पुर, प्रसहता, दियां, सहेपुर, गुरैनी, कवलपुरा, सोनहुली, महुजी और जिगना समेत कई गांव गंगा कटान से प्रभावित हैं. हजारों बीघा कृषि भूमि कटान की चपेट में आने से किसानों के सामने आजीविका का संकट गहरा गया है.
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अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष श्रवण कुशवाहा ने कहा कि क्षेत्र में गंगा कटान की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रशासन, जनप्रतिनिधि और सरकार इस ओर गंभीर नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि धानापुर और गुरैनी ग्राम सभाओं में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गरीब किसानों की जमीनों के दस्तावेजों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह आंदोलन अब शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा.

