लखनऊ. एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट से पता चला है कि योगी सरकार अपने विज्ञापन के लिए हर रोज 2.32 करोड़ रुपए खर्च किया है. जो कि मोदी सरकार से भी ज्यादा है. 8 साल में कुल खर्च की बात की जाए तो 6811.94 करोड़ रुपये सिर्फ विज्ञापन पर ही खर्च किए गए हैं. जिसे लेकर एक बार फिर अखिलेश यादव ने तंज कसा है. उन्होंने कहा, बनाने चले Brand, बज गया Band!
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आगे अखिलेश यादव ने कहा, अब 7000 करोड़ एक साल में भी खर्च कर दें तो भी कुछ बदलने वाला नहीं. डबल इंजन के आपसी कम्पटीशन में गुरु गुड़ रह गया, चेला शक्कर हो गया. ये बात अलग है कि ज़्यादा मीठे के चक्कर में सब कड़वा हो गया. अच्छे व्यवहार, अच्छे करम और जन हित के काम से बड़ा कोई और प्रचार नहीं होता है.
उन्होंने ये भी कहा कि इनके अत्याचार, अन्याय, महिलाओं-अधिकारियों-पत्रकारों-प्रोफ़ेसरों से दुर्व्यवहार, दुर्वचन, सजातीय पक्षपात, पीडीए पर प्रहार, ‘हाता नहीं भाता’ के फ़ार्मूल के विस्तार, महा-भ्रष्टाचार के द्रव्य के स्वर्ण-ठोसीकरण, मंदिर चोरी के आरोपियों को दोषपूर्ण SIT से बचाने व प्रतिशोध की राजनीति के कारण घर-मकान-दुकान से लेकर यूनिवर्सिटी तक गिराने जैसी नकारात्मक-संकीर्ण राजनीति के कारणवश इनकी इमेज का एनकाउंटर हो गया है और उसके ऊपर से बुलडोज़र भी गुज़र गया है.
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आगे अखिलेश यादव ने कहा कि इनकी छवि तो बनी नहीं, अधिकारियों के घर-महल ज़रूर बन गए. जनता पूछ रही है लखनऊ से गोरखपुर कोई डाइरेक्ट ट्रेन है क्या, क्योंकि अपने बनाए भाजपाई एक्सप्रेसवे से जाने का जोखिम तो वो उठाएंगे नहीं. ‘एक-दो’ आइटम छोड़कर बाक़ी सब वैध सामान ले जाने के लिए मूवर्स एंड पैकर्स भी तैयार बैठे हैं.


