लखनऊ. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा पर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने कहा है कि जब 9 साल में भाजपा सरकार प्रदेश की जनता के लिए कुछ नहीं कर सकी तो आखिरी के 9 महीनों में ये मंत्री क्या कर लेंगे? भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी में बढ़ाकर सारे रिकार्ड तोड़ दिए है. ये भी वही करेंगे. भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार, अत्याचार चरम पर है. पीडीए के साथ अन्याय हो रहा है. जनता त्रस्त है. विकास कार्य ठप्प है. भाजपा सरकार एक तरफ सरकारी बजट की लूट कर रही है तो दूसरी तरफ जनता की जेब काट रही है.
आगे अखिलेश यादव ने कहा कि जल जीवन मिशन में पानी की टंकियां भाजपा के भ्रष्टाचार को सहन नहीं कर पा रही है. लगातर टंकिया गिर रही है. स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग बर्बाद हो गया है. कमीशनखोरी और मुनाफाखोरी से मंहगाई, भ्रष्टाचार और तेजी से बढ़ रहा है. इस सरकार में वृक्षारोपण भी भ्रष्टारोपण साबित हुआ है. इसी तरह स्मार्ट मीटरों के जरिए भाजपा प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की जेब से पैसा निकाल कर उद्योगपतियों की जेबों में डाल रही है. भाजपा उत्तर प्रदेश की जनता को चौतरफा लूट रही है.
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अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नौकरियों में आरक्षण का घोटाला कर रही है. हक और अधिकार छीन रही है. भाजपा समाजवादी पार्टी के पीडीए से घबराई हुई है. पीडीए समाज भाजपा की चाल को समझ रहा है. पीडीए एकजुट होकर भाजपा की हर साजिश और षड्यंत्र को परास्त करेगा. समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पीडीए को हक, सम्मान और न्याय मिलेगा. प्रदेश का विकास होगा. गरीबों का मुफ्त इलाज होगा. केजी से पीजी तक बेटियों की शिक्षा मुफ्त होगी.
अखिलेश यादव ने कहा कि वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में तो इनका कोई काम है नहीं. उधर से पर्ची आएगी, यहां तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी. भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है, Courier & Messenger. वैसे जनता पूछ रही है कि फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे बैठकर? जनता का अनुरोध है कि फ़िल्म ध्यान से देखिएगा, हो सकता है ‘कर्मफल-कंसफल’ का सिद्धांत समझकर कुछ जागरण हो जाए और कुछ अच्छा बदलाव भी. हम तो यही मानते हैं कि मूल रूप से व्यक्ति नहीं उसका ‘लालच-लोभ’ ही बुरा होता है, जो धीरे-धीरे उसका दुराचरण बन जाता है. बुराई इंसान को और बुरा बनाती जाती है.
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आगे उन्होंने ये भी कहा कि इसके विपरीत ये भी सच है कि जब व्यक्ति ‘स्वार्थ’ को छोड़कर ‘परमार्थ’ के मार्ग पर चल निकलता है तो सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है, वो मानवता के लिए सार्थक साबित हो सकता है. अपने अंदर की सौ बुराइयों के ऊपर चंद अच्छाइयां जीत हासिल कर सकती हैं, यही महाकाव्यों का गहरा आंतरिक संदेश है. अपनी गलतियों और दुर्भावनाओं के लिए प्रायश्चित करने का कोई स्थान नियत नहीं होता है, इसके लिए अंदर का प्रकाश चाहिए जो सैकड़ों लोगों के बीच ‘अंधेरे बंद परिसर’ में भी हो सकता है. तमसो मा ज्योतिर्गमय!
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