लखनऊ. सूबे की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है. सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर जमकर सियासत देखने को मिल रही है. भाजपा और उसके सहयोगी दल सपा पर हमलावर तो हैं ही, लेकिन अब मायावती ने भी सपा के पीडीए एजेंडे को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सपा को परिवारवादी और पूंजीपतियों की पार्टी करार दिया है. साथ ही अखिलेश यादव के पीडीए फार्मूले को छलावा बताया है.
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मायावती ने कहा कि जैसा कि यह सर्वविदित है कि बीएसपी किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों को टिकट नहीं देती है. यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है. बीएसपी की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है.
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आगे मायावती ने कहा कि इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है, जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं. जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं. लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ और चुनाव हारने के लिए होगा. तो इस प्रकार का है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद और विधायक ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है. जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही.
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आगे मायावती ने ये भी कहा कि वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है. इसीलिए ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों औऱ ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत-सतर्क हो जाना चाहिए कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बीएसपी में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है.

