लखनऊ. सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विरासत में सत्ता मिल सकती है, बुद्धि नहीं. उन्होंने पीडीए बनाया, लेकिन जरूरत के अनुसार पीडीए का नाम बदलते रहते हैं.

आगे ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव एसी-पीसी वाले नेता हैं, उनका गरीबों से कोई वास्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि चवन्नी को रुपया बना रहे हैं, हम उन्हें समझा देंगे कि आप जहां से चले थे, वहीं रह जाएंगे. मानसिक संतुलन बिगड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता का इतिहास पढ़ना चाहिए. चौधरी चरण सिंह ने ही मुलायम सिंह को नेता बनाया था. अब जिन्होंने आपको नेता बनाया, उन्हें चवन्नी बता रहे हैं और खुद को रुपया समझ रहे हैं. इतिहास पढ़कर बात करो.

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सीट बंटवारे के मसले पर पूछने पर उन्होंने कहा कि सीटों का कोई झगड़ा नहीं है, झगड़ा गरीबों और वंचितों को न्याय दिलाने का है. आरक्षण के मसले पर उन्होंने कहा कि 1993 से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आरक्षण मिल रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी का कोई नेता सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की बात नहीं करता.

स्कूलों में हिजाब न पहन कर आने के हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों का जो अपना-अपना ड्रेस कोड है, उसे पहनना पड़ेगा. कानून का राज है, कानून सबको मानना पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि एक मौलाना ने आवाज उठाई थी कि कृष्ण भगवान पांच वक्त के नमाजी थे, लेकिन अखिलेश यादव ने एक बार भी आवाज नहीं उठाई, जबकि वे खुद को कृष्ण के वंशज बताते हैं.

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आरक्षण समाप्त करने के मसले पर पूछने पर उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में एनडीए के खिलाफ सभी पार्टियों ने कहा था कि भाजपा सरकार बनी तो आरक्षण खत्म हो जाएगा, लेकिन आज तक नहीं हुआ. ये सत्ता जाने से पागल हैं, कुछ भी बोल देते हैं. महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महंगाई है तो संसाधन भी बढ़े हैं. पहले लोग कच्चे घरों में रहते थे. पहले बिजली 4-5 घंटे आती थी, आज 18 घंटे मिल रही है. सरकार बिना ब्याज के युवाओं को 5 लाख रुपये दे रही है, किसान सम्मान निधि दे रही है. गरीबों को राशन मिल रहा है और साल में छह हजार रुपये खाद-पानी के लिए दिए जा रहे हैं.

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मछली ज्यादातर सनातनी खाते हैं पर, सावन महीने में नहीं खाते. कांग्रेस के लोग अयोध्या में मछली भोज कर रहे हैं, यह सनातनियों का अपमान है. अगर वे स्वीकार करते हैं कि नहीं खाया तो अच्छी बात है, लेकिन वहां क्यों गए. साथ ही उन्होंने संजय निषाद द्वारा कही गई बात कि ‘निषाद समाज के लोग मछली-भात कहते हैं, की तारीफ करते हुए कहा कि वे अच्छी बात कर रहे हैं और रात-दिन पानी में ही रहते हैं.