लखनऊ। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उत्तर प्रदेश लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 के पहले छह माह में प्रदेश ने निर्धारित वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 48 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करते हुए 3.37 लाख से अधिक टीबी मरीजों की पहचान कर उनका उपचार शुरू कराया है। मरीजों के नोटिफिकेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है।

मरीज निजी चिकित्सकों के माध्यम से चिन्हित

प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए सात लाख टीबी मरीजों की पहचान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जनवरी से जून के बीच कुल 3,37,000 से अधिक मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया, जिनमें 2,24,665 मरीज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तथा 1,12,303 मरीज निजी चिकित्सकों के माध्यम से चिन्हित किए गए हैं।

अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने शुक्रवार को टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए समय पर मरीजों की पहचान और उनका समुचित उपचार सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अभियान को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए।

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उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश को 6.75 लाख मरीजों की पहचान का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष 6.90 लाख मरीजों का सफलतापूर्वक नोटिफिकेशन किया गया था। उन्होंने शेष छह माह में वर्ष 2026 के लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जनपदों को और अधिक सक्रियता के साथ कार्य करने को कहा।

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हाल ही में सम्पन्न 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 1,95,876 टीबी मरीजों की पहचान की गई। इनमें 1,23,395 ऐसे मरीज हैं, जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है और उनका उपचार डिफ्रेंशिएटेड टीबी केयर के तहत किया जाएगा। अभियान के दौरान दो लाख से अधिक पात्र व्यक्तियों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) से भी जोड़ा गया।

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प्रदेशभर में लगभग 27 हजार आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से बड़े पैमाने पर टीबी स्क्रीनिंग कर मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित की गई। इसके अलावा लखनऊ, जेवर, वाराणसी और गोरखपुर एयरपोर्ट पर आयोजित विशेष शिविरों में 885 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई।यदि आप चाहें तो इसे 450-500 शब्दों की विस्तृत अखबारी रिपोर्ट के रूप में भी तैयार किया जा सकता है।