लखनऊ. उत्तर प्रदेश में स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा और सफारी जैसी 7 से 9 सीटर निजी गाड़ियां रखने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है. परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत छह से अधिक और नौ सीट तक क्षमता वाले गैर-परिवहन वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया था. नए आदेश के बाद इन निजी वाहनों को केवल सीट क्षमता के आधार पर हर साल फिटनेस कराने की जरूरत नहीं होगी.

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2005 का पुराना आदेश हुआ निरस्त

परिवहन आयुक्त की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर-परिवहन वाहनों पर केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की शर्त लागू करना उचित नहीं था. निजी वाहनों से जुड़े फिटनेस नियम निर्धारित करने का अधिकार केंद्र सरकार के अधीन है. इसी कानूनी स्थिति को देखते हुए 12 दिसंबर 2005 का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया है.

RTO के चक्कर और फीस से राहत

इस फैसले से 7 से 9 सीटर निजी वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी. उन्हें फिटनेस फीस, आरटीओ कार्यालय की प्रक्रिया और बार-बार नवीनीकरण के लिए होने वाली भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक मुख्यालय के निर्देश के बाद ऐसे निजी वाहनों को फिटनेस से मुक्त किया गया है.

गाजियाबाद में लाखों वाहन प्रभावित

गाजियाबाद में एक लाख से अधिक निजी वाहन ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें इस फैसले का लाभ मिल सकता है. इनमें एसयूवी और एमयूवी समेत कई पारिवारिक वाहन शामिल हैं. हालांकि, राहत केवल गैर-परिवहन निजी वाहनों पर लागू होगी. व्यावसायिक या परिवहन श्रेणी के वाहनों पर लागू फिटनेस नियम इससे प्रभावित नहीं होंगे.

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फिटनेस जांच खत्म होने से सुरक्षा पर सवाल

फिटनेस की अनिवार्यता हटने के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं. पुरानी निजी गाड़ियों की तकनीकी स्थिति की नियमित जांच नहीं होने पर खराब ब्रेक, टायर या अन्य यांत्रिक खामियां समय पर सामने नहीं आ सकतीं. ऐसे में वाहन मालिकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे अपने वाहनों की नियमित सर्विस और तकनीकी जांच कराते रहें. आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक मुख्यालय के निर्देश के तहत 7 से 9 सीट वाले निजी वाहनों को फिटनेस से छूट दी गई है.