Rajasthan News: जोधपुर के अस्पताल में 8 प्रसूताओं की हालत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया है। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि ये केस कोटा और बीकानेर की घटनाओं से बिल्कुल अलग हैं। एक महिला को इलाज के लिए एम्स रेफर किया गया है, जबकि दूसरी महिला को भी शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।

क्या है जोधपुर का पूरा मामला?
जोधपुर के अस्पतालों में इन दिनों रेफर केस की बाढ़ आ गई है। मंत्री ने बताया कि एम्स भेजी गई महिला पहले से ही दिल की बीमारी से जूझ रही थी। वहीं, एक अन्य महिला को पीलिया की गंभीर शिकायत है। 15 मई को एक महिला को यहां भर्ती कराया गया था, जो करीब एक महीने तक वेंटिलेटर पर रही और आखिरकार दम तोड़ दिया। मंत्री के मुताबिक, अभी अस्पताल में भर्ती बाकी 6 मरीजों की हालत स्थिर है।
धक्के खाकर सरकारी अस्पताल आते हैं मरीज
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच मंत्री ने कहा कि लोग पहले निजी अस्पतालों में अपनी जेब खाली करवाते हैं। जब वहां स्थिति काबू से बाहर हो जाती है या पैसा खत्म हो जाता है, तब मरीज सरकारी अस्पताल दौड़ते हैं। उन्होंने कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल का हवाला देते हुए कहा कि वहां हर साल 6 हजार डिलीवरी होती है। अगर व्यवस्था खराब होती, तो इतनी भारी संख्या में लोग वहां क्यों जाते?
दर्द से बचने का परिणाम, सिजेरियन डिलीवरी
मंत्री ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी और महिलाएं दर्द सहन करने से बच रही हैं। इसी वजह से सिजेरियन डिलीवरी का चलन बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सिजेरियन में ब्लीडिंग ज्यादा होती है, जिससे बाद में किडनी फेल होने का खतरा बना रहता है। फिलहाल, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल फेल होने के बाद सरकार ने संबंधित फैक्ट्री को ही ताला लगा दिया है। मंत्री ने साफ किया कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
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