चंडीगढ़। हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनियों को देने के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बुधवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जनसुनवाई पूरी कर ली। अब आयोग जल्द ही इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला ले सकता है। प्रस्ताव का बिजली कर्मचारी संगठनों, इंजीनियरों और राजनीतिक दलों ने जोरदार विरोध किया है।
अदानी समेत निजी कंपनियों ने किया आवेदन
अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने गुरुग्राम में बिजली वितरण लाइसेंस के लिए औपचारिक आवेदन किया है। वहीं इलेवन नामक कंपनी ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने के लिए 4,716.73 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति कर सकेंगी।
विद्युत अधिनियम-2003 के तहत मांगा लाइसेंस
कंपनियों ने अपने आवेदन में विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 14 का हवाला देते हुए कहा है कि एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरण लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं। कंपनियों का दावा है कि वे कृषि, घरेलू, औद्योगिक, व्यावसायिक और कम आय वर्ग के सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से बिजली उपलब्ध कराएंगी।
जनसुनवाई में हुआ जोरदार विरोध
जनसुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो नेता संपत सिंह ने निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री कराना चाहती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कर्मचारी संगठनों ने बताया सार्वजनिक व्यवस्था पर खतरा
इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और सुरेश राठी ने कहा कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देना हरियाणा की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने और निजीकरण का रास्ता खोलने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस कदम का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।प्रस्ताव के विरोध में बुधवार को गुरुग्राम और नूंह की सभी डिवीजनों में कर्मचारियों ने दो घंटे का विरोध प्रदर्शन भी किया।
इंजीनियरों ने उठाए कानूनी और वित्तीय सवाल
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान पुनीत कुंडू और महासचिव रविंद्र घनघस ने आयोग के समक्ष आवेदन खारिज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एक वर्ष पहले गठित और एक करोड़ रुपये की चुकता पूंजी वाली कंपनी गुरुग्राम और नूंह जैसे बड़े राजस्व वाले क्षेत्रों में बिजली वितरण का लाइसेंस मांग रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा के लिए मजबूत नेटवर्क, प्रशिक्षित मानव संसाधन, उपभोक्ता सेवा प्रणाली, एससीएडीए, सब-स्टेशन, आपातकालीन व्यवस्था और पर्याप्त वित्तीय क्षमता आवश्यक होती है, जिसका पर्याप्त प्रमाण आवेदनकर्ता कंपनियों ने प्रस्तुत नहीं किया है।
बिजली दरों पर पड़ सकता है असर
एसोसिएशन का कहना है कि गुरुग्राम और नूंह से डीएचबीवीएन को कुल राजस्व का लगभग 27.5 प्रतिशत प्राप्त होता है। यदि लाभकारी उपभोक्ता निजी कंपनियों की ओर चले गए तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

