हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में जारी तबादला सूची ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि फर्जी नामांतरण मामले में संदेह के घेरे में रहे कर्मचारी मयूर पाटिल को नगर निगम मुख्यालय में एआरओ (सहायक राजस्व अधिकारी) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले के बाद निगम की कार्यप्रणाली और तबादला प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम में पिछले कुछ समय से फर्जी नामांतरण के मामलों की जांच चल रही है। इन्हीं मामलों में जिन कर्मचारियों के नाम चर्चा में रहे, उनमें मयूर पाटिल का नाम भी शामिल बताया जाता रहा है। ऐसे में उन्हें मुख्यालय में अहम पद दिए जाने से कर्मचारियों और जानकारों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या अनुभव से ज्यादा ‘पसंद’ को मिली प्राथमिकता?
राजस्व विभाग की नई तबादला सूची को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कई अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाकर कम अनुभवी कर्मचारियों को प्रमुख पदों पर बैठाया गया है। आलोचकों का कहना है कि तबादलों में अनुभव और कार्यकुशलता की बजाय पसंद-नापसंद को अधिक महत्व दिया गया है।
जांच पूरी होने से पहले जिम्मेदारी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी कर्मचारी का नाम किसी संवेदनशील मामले में जांच या संदेह के दायरे में रहा है, तो जांच पूरी होने से पहले उसे मुख्यालय में इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई? इस फैसले से निगम प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
तबादला सूची बनाने वालों पर भी उठ रहे सवाल
राजस्व विभाग के भीतर चर्चा है कि केवल तबादलों पर ही नहीं, बल्कि पूरी सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह मांग भी उठ रही है कि तबादलों के आधार और मापदंड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन कारणों से अधिकारियों और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां दी गईं।
अब निगाहें निगम प्रशासन पर
फिलहाल तबादला सूची जारी होने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब यह देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और फर्जी नामांतरण मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।


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