UPSC Civil Services Prelims 2026 को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। परीक्षा के GS Paper-1 (Set A) में पूछे गए 8 सवालों को अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर गलत और त्रुटिपूर्ण बताते हुए Central Administrative Tribunal (CAT) का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए CAT ने सोमवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।

किन 8 सवालों पर उठे सवाल?

याचिकाकर्ताओं ने Set A के प्रश्न नंबर 7, 11, 45, 60, 62, 82, 86 और 96 पर आपत्ति जताई है। उम्मीदवारों का दावा है कि इन सवालों में तथ्यात्मक और संरचनात्मक खामियां हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, कुछ प्रश्नों के लिए UPSC की प्रोविजनल आंसर-की में दिए गए उत्तर सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते, जबकि कुछ सवालों में दिए गए चारों विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है।

उम्मीदवारों ने UPSC पर क्या आरोप लगाए?

याचिका के मुताबिक, अभ्यर्थियों ने मई में प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद UPSC के आधिकारिक पोर्टल और ईमेल के जरिए दस्तावेजी सबूतों के साथ आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उम्मीदवारों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों पर कोई स्पष्ट जवाब दिए बिना ही परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शांतनु जुगतावत ने मामले में छात्रों का पक्ष रखा।

क्या है छात्रों की मांग?

अभ्यर्थियों ने CAT से मांग की है कि UPSC यह स्पष्ट करे कि विवादित सवालों पर दर्ज आपत्तियों पर क्या निर्णय लिया गया। यदि आपत्तियां खारिज की गई हैं, तो आयोग को उसका उचित कारण भी बताना चाहिए। छात्रों की मुख्य मांग है कि इन 8 विवादित प्रश्नों को सही किया जाए या मूल्यांकन से बाहर किया जाए, ताकि उम्मीदवारों के साथ निष्पक्षता बनी रहे।

कटऑफ और मेन्स पर कितना असर?

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन 8 प्रश्नों का नेगेटिव मार्किंग सहित प्रभाव 16 से अधिक अंकों तक हो सकता है। UPSC Prelims में कटऑफ के आसपास कुछ अंकों का अंतर भी उम्मीदवार के चयन या बाहर होने का कारण बन सकता है। ऐसे में छात्रों का कहना है कि विवादित प्रश्नों का असर कई उम्मीदवारों के Mains के लिए चयन पर पड़ा है।

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