भुवनेश्वर। ओडिशा में शहरी विकास को अधिक गति देने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को खत्म करने और नगर निकायों (ULBs) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नगर विकास विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए नगर निगम आयुक्तों, नगर पालिकाओं के कार्यपालक अधिकारियों (EO) और स्मार्ट सिटीज के प्रबंध निदेशकों (MD) की वित्तीय शक्तियों में भारी बढ़ोतरी की है। सरकार द्वारा संशोधित यह नई व्यवस्था राज्य में तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।

प्रमुख सुधार और नए वित्तीय अधिकार

स्मार्ट सिटी MD को मिला कमिश्नर का दर्जा: भुवनेश्वर और राउरकेला स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशकों (MD) के वित्तीय अधिकारों को अब नगर निगम आयुक्तों के समकक्ष कर दिया गया है।

बिल मंजूरी की सीमा दोगुनी हुई: नगर निगमों में निर्माण कार्यों, खरीद और कार्यालयीन खर्चों के बिलों को मंजूरी देने की आयुक्त की सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है। (पहले यह सीमा भुवनेश्वर में 50 लाख रुपये और अन्य नगर निगमों में महज 15 लाख रुपये थी)।

प्रशासनिक स्वीकृति की सीमा बढ़ी: विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक स्वीकृति देने की सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

वेतन और पेंशन का पूर्ण अधिकार: नगर निगम आयुक्तों को कर्मचारियों के वेतन और पेंशन बिलों को बिना किसी वित्तीय सीमा के जारी करने का पूरा अधिकार दिया गया है।

नगरपालिका और एनएसी (NAC): नगरपालिकाओं और विज्ञापित क्षेत्र परिषदों के कार्यपालक अधिकारियों के बिल मंजूरी और प्रशासनिक मंजूरी की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।

जनता और बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

राज्य सरकार के इस प्रशासनिक सुधार से नगर निकायों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त होगी। फाइलों के निपटारे में होने वाली लालफीताशाही और अनावश्यक देरी कम होगी, जिससे नागरिकों से जुड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं और जनकल्याणकारी कार्य समय पर पूरे हो सकेंगे।

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