वैभव बेमेतरिहा की रिपोर्ट-
रायपुर। विधायक का रिपोर्ट कार्ड में रिपोर्ट वैशालीनगर विधानसभा की. वैशाली नगर से विधायक हैं नगर निगम की राजनीति में लंबी पारी खेलकर विधानसभा पहुंचने वाले रिकेश सेन. पार्षद से पहिली बार विधायक बनने वाले रिकेश सेन की छवि एक तेज-तर्रार और सोशल मीडिया में ट्रेंड करने वाले विधायक की है. विधानसभा में जोर-शोर से मुद्दों को उठाते हैं. अपनी सरकार के मंत्रियों को सदन में घेरने भी पीछे नहीं रहते हैं. लेकिन रिकेश सेन अपने विधानसभा क्षेत्र में कितने सक्रिय हैं ? उनके कार्यकाल का जो ढाई साल बीत चुका है उस पर लोगों का क्या कहना है ? विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्या है ? आखिर क्यों एक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता रिकेश सेन का नाम सुनते ही भड़क उठा ? आखिर क्षेत्र में OYO और सट्टा पर दबी जुबान क्यों होती है चर्चा ? इसी को जानने लल्लूराम डॉट कॉम की टीम वैशाली नगर विधानसभा पहुंची.
वैशालीनगर विधानसभा में भिलाई नगर निगम का आधा हिस्सा शामिल है. नगरीय क्षेत्र होने के बाद भी आज भी वैशाली नगर में कई पुरानी बस्तियाँ और स्टील प्लांट का पुराना कैंप एरिया भी है. सुपेला, रामनगर, कोहका, कुरूद, कोसा नाला, बैंकुठ जैसी पुरानी बस्तियों में ग्राउंड रिपोर्ट की हमारी शुरुआत कुरुद बस्ती से हुई.
कुरुद बस्ती आज भी अपनी पुरानी बसाहट के साथ विकास के अभाव में है. बस्ती में प्रवेश करते ही धूल से ढका बोर्ड दिखा. अंदर प्रवेश करते ही क्रांकीट से बनी पुरानी सड़क. सड़क के किनारे कचरे से पटी नालियाँ. नालियों के बीच एक पट चुका नाला और नाले के पास नशे में उपयोग में लाए जानी वाली ढेरों सामग्रियाँ.

स्थानीय लोगों ने कहा कि वे अपने विधायक को अच्छे से जानते हैं. लेकिन चुनाव जीतने के बाद इधर आए नहीं. विकास का कोई काम बीते ढाई वर्षों में नहीं हुआ है. बस्ती में सबसे बड़ी समस्या सफाई और पानी की है. पानी भीषण संकट मोहल्ले में हैं. मोहल्ले में विधायक का वादा अभी पूरा नहीं हुआ है.
वार्ड 22 के लोगों ने कहा कि चुनाव के समय रिकेश सेन आए थे. चुनाव के बाद नहीं. सड़क, नाली और पानी को लेकर काम अधूरा है. पूरी तरह से सूख चुके दर्री तालाब को दिखाते हुए स्थानीय लोग कहते हैं, इससे अंदाजा लगा सकते हैं पारा में पानी का संकट किस तरह होगा. विधायक के पास कई बार गए काम नहीं हुआ.
कोहका, फरीद नगर, राधिका नगर, सुपेला, कोसा नगर, राम नगर घूमते हुए हमारी टीम स्टील नगर पहुँची. स्टील नगर वार्ड-28 में एक चाय के दुकान पर हमारी नजर पड़ी. गाड़ी रुकी और मैं और कैमरामैन साथी चाय पीने के लिए रुक गए. बातचीत में पता चला स्टील नगर में आशा दीदी की चाय दुकान बहुत पुरानी है. लेकिन इसी बातचीत में यह भी पता चला कि चाय दुकान चलाने वाली आशा दीदी अपने विधायक को नहीं जानती. उन्होंने कहा कि वे रिकेश सेन से नहीं मिली है. उनके दुकान पर या स्टील नगर इधर आए ही नहीं.
चाय की दुकान पर कुछ भी लोग थे उनमें कुछ विधायक को जानने वाले थे, लेकिन विकास क्या इसे जानने वाले नहीं. हालांकि नाई की दुकान पर एक युवा, जो शायद विधायक का प्रशसंक है, वो जरूर कई काम बताने लगा. जैसे विधायक के पास कोई भी काम लेकर जाओ हो जाता है. कोई काम नहीं रुकता. जरूरत पड़ने पर आते हैं. इसी बीच एक वरिष्ठ व्यक्ति नाराजगी जाहिर करते हुए भड़क जाते हैं. पूछने पता चला कि वे भाजपा के सीनियर कार्यकर्ता हैं. नाम आर.एस. मौर्य है. क्षेत्र में भाजपा को मजबूत करने काफी काम उन्होंने किया है.
भाजपा कार्यकर्ता मौर्या गुस्से में कहते हैं विधायक बनने के बाद स्टील नगर में एक दौरा नहीं हुआ है. झांकने तक नहीं आए हैं. एक काम वार्ड में 28 में नहीं हुआ है. विधायक हवा में उड़ेगा, तो काम नहीं होगा. सड़क, नाली, पानी पर काम नहीं हुआ है. विधायक को मिलने रहना चाहिए. उनसे पहले भसीन थे, निरंकारी थे. सब आते थे. ये तो आते ही नहीं. कांग्रेस विधायक देवेन्द्र का काम मुझे ठीक लगता है. वे लोगों से मिलते तो हैं.
वार्ड 31 के अंदर गली में हम पहुँचे ही थे कि, कैमरा देखते ही महिलाएं घर से बाहर आ गईं. आक्रोशित महिलाएं पानी…पानी…पानी चिल्लाने लगी. एक दुखी महिला घर दूषित पानी लाकर दिखाती हुई कहती हैं कि बताइए इसे कैसे पीए ? मैंने कहा कि नल-जल योजना से पानी आ रहा होगा. कहती हैं कुछ महीने पहले तक उसी पानी को पीते थे, बेटा पीलिया से ग्रसित हो गया. बड़ी मुश्किल से जान बच पाई. नल का पानी पीना छोड़ दिए. हैंडपंप का पानी पीते हैं, लेकिन वो भी आयरन युक्त है. लाल और पीला पानी यही निकल रहा है. पार्षद के पास शिकायत करो, तो विधायक से मिलने बोलते हैं. विधायक को बोलो तो पार्षद के पास भेज देते हैं. महीनों से यही चल रहा है.
वार्ड 30 का हाल भी यही मिला है. एक नागरिक ने तंज कसते हुए कहा कि जीतने के बाद भला कोई आता है क्या ? चुनाव के दौरान नेता हाथ जोड़े आते हैं, उसके बाद जनता 5 साल हाथ जोड़े गुहार लगाती रह जाती है.
बैकुंठ की ओर से जाने पर कचरों का ढेर और एक कचरा डंप करने वाले मैदान में भविष्य गढ़ते खिलाड़ी बच्चें मिले. उसके आगे कैलाश नगर, हाउसिंगबोर्ड कॉलोनी होते हुए फौजी नगर पहुँचे तो विधायक को लेकर लोग कुछ सकारात्मक बात करते मिले. हालांकि यहाँ भी फ्री-होल्ड मकानों का वादा पूरा नहीं होने का मामला सामने आया है.
शाम ढलते-ढलते हमारा पड़ाव कैंप-2 में जलेबी चौक के पास जाकर समाप्त हुआ. यहाँ जो लोग मिले उन्होंने बताया कि रिकेश सेन पहले यहीं रहते थे. उनका व्यवहार अच्छा है. वे इधर आते भी हैं. ढाई वर्षों में अभी तक क्या हुआ पूछने पर कहते हैं, काम तो ऐसा कुछ हुआ नहीं जिसे बताया जा सके. सड़क चौढ़ीकरण का वादा, लेकिन पूरा नहीं हुआ है. कोई परिवर्तन अभी कैंप क्षेत्र में नहीं आया है.
इन सबके बीच विधानसभा क्षेत्र में हमने OYO और सट्टा को लेकर होने वाली चर्चा पर लोगों से सवाल किया. लेकिन किसी ने भी कैमरा के सामने कुछ भी नहीं कहा. लेकिन दबी जुबान के बीच इन विषयों पर कई कहानियाँ हैं. खैर ग्राउंड पर पहली बार के विधायक के सामने अभी कई चुनौतियाँ है. इन चुनौतियों के बीच अभी काम करने का अवसर भी है. वक्त के साथ क्या-क्या बदल पाने विधायक सफल होंगे इसके लिए इंतजार करना होगा.
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विधायक का रिपोर्ट कार्ड। वैशालीनगर Ground Report । BJP MLA रिकेश सेन। Dr. Vaibhav Bemetariha
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