Dharm Desk – वास्तु शास्त्र के नियम केवल घर या मकान या ऑफिस बनाने की सजावट तक की सीमित नहीं होता है बल्कि यह जीवन में ऊर्जा के संतुलन से भी जुड़ा है। आस-पास की दिशा, कमरे का वातावरण और दिनचर्या मिलकर व्यक्ति के जीवन पर असर डालती है। जब चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है तो जीवन में प्रगति और शुभ कार्य आसानी से होते हैं, लेकिन नकारात्मक ऊर्जा कई बार ऐसे अवरोध खड़े कर देती है, जिनका कारण समझ पाना आसान नहीं होता। शादी में देरी भी कई बार इन्हीं कारणों से जुड़ी मानी जाती है।

  1. सही दिशा में सोना जरूरी

कुंवारे लड़के और लड़कियों को दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके नहीं सोना चाहिए। यह दिशा स्थिरता और भार की मानी जाती है, जो वैवाहिक योग में रुकाटब पैदा कर सकती है। लगतार इस दिशा में सोने से रिश्ते बनने में देरी और बाधाएं आने लगती हैं।

  1. रोशनी, हवादार कमरे में सोए

शादी की दहलीज पर खड़े युवाओं को ऐसे कमरे में सोना चाहिए जहां पर्याप्त हवा और रोशनी आती हो। इस इस तरह बोला जा सकता है कि खुले कमरे में सोना चाहिए। जिन कमरों में खिड़कियां कम हों या जहां अंधेरा अधिक रहता हो, वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसे वातावरण में रहने से मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है, जिससे निर्णय लेने में असमंजस और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।

  1. अहम भूमिका कमरे की बनावट भी रखती है

वास्तु के अनुसार ऐसे कमरे बेहतर माने जाते हैं जिनमें एक से अधिक दवारजे हों और हवा का आवागमन बना रहेता है, बंद और संकुचित जगहों में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं, खासकर विवाह जैसे विषय में।

  1. बेहतर होगा काले रंग से दूरी

वास्तु शास्त्र में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा गया है। शादी योग्य युवाओं को काले रंग के कपड़े और उससे जुड़ी काली चीजों का यूस कम करना चाहिए, इसके बजाय हल्के और सकारात्मक रंग जैसे सफेद, पीला या गुलाबी जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने में सहाकय माने जाते हैं।