Vehicle Headlight New Rules: कारों, टू-व्हीलर, बसों और ट्रकों की आंखों को अंधा कर देने वाली हेडलाइट की चमक बड़ी समस्या बन रही है। अधिकतर लोग गाड़ियों की हेडलाइट को लो बीम की जगह हाई बीम पर जलाते हैं। इससे सड़क पर रात के समय तेज रोशनी से गाड़ी चालकों को परेशानी होती है, जो हादसे का कारण बनता है। हालांकि अब तेज हेडलाइट से आंखें नहीं चौंधियाएंगी। मोदी सरकार गाड़ियों के हेडलाइट पर नया नियम ला रही है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इसमें हेडलाइट की चमक, हाई-बीम के इस्तेमाल और भारी वाहनों की विजिबिलिटी से जुड़े कई बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इनका मकसद सड़क पर होने वाली चकाचौंध कम करना और रात में ड्राइविंग को सुरक्षित बनाना है। इसके अलावा हाई-इंटेंसिटी वाली हेडलाइट की मैक्सिमम इंटेंसिटी लाइट पर भी सख्ती की जाएगी।
प्रस्ताव के मुताबिक नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप को सिर्फ लो-बीम पर चलाने का नियम लाया जा सकता है। यानी हेडलैंप अपने आप ऑन होगा लेकिन सामान्य स्थिति में लो-बीम पर रहेगा। हालांकि मौजूदा दोपहिया वाहनों को इस प्रस्ताव के दायरे से बाहर रखा जाएगा। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप On यानी AHO सिस्टम एक्टिव होने पर हेडलैंप केवल पासिंग बीम यानी Low Beam पर चलेगा। फिलहाल AHO सिस्टम वाहन की सेटिंग के आधार पर Low Beam और High Beam के बीच स्विच कर सकता है। नए प्रस्ताव के बाद ऑटोमैटिक सिस्टम एक्टिव रहने पर हेडलाइट Low Beam पर ही रहेगी।
हेडलाइट की रोशनी भी होगी कम
दोपहिया वाहन: 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला
कार: 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला
इसका सीधा मकसद यह है कि सामने से आने वाले वाहन की हेडलाइट दूसरे ड्राइवर की आंखों पर जरूरत से ज्यादा तेज रोशनी न डाले।
6,500 Kelvin से ज्यादा नहीं होगा कलर टेम्परेचर
हेडलाइट की सिर्फ चमक ही नहीं उसके रंग को लेकर भी सीमा तय करने का प्रस्ताव है। हेडलाइट का कलर टेम्परेचर 6,500 Kelvin तक सीमित किया जा सकता है। आसान भाषा में समझें तो बहुत ज्यादा सफेद या नीली रोशनी वाली तेज हेडलाइट से होने वाली परेशानी को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

शहर में हाई-बीम जलाया तो मिलेगा अलर्ट
शहरों में बिना जरूरत हाई-बीम चलाने पर वाहन में ऑडियो अलर्ट देने का भी प्रस्ताव है यानी अगर कोई चालक ऐसी स्थिति में हाई-बीम का इस्तेमाल करता है। जहां इसकी जरूरत नहीं है तो उसे वाहन की ओर से चेतावनी मिल सकती है। हालांकि हाईवे पर 60 किमी/घंटे से ज्यादा की रफ्तार में यह ऑडियो अलर्ट नहीं देने का प्रस्ताव है ताकि तेज रफ्तार में ड्राइविंग के दौरान अनावश्यक चेतावनियां परेशानी न बनें।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
रात में सड़क हादसों का एक कारण चकाचौंध यानी ग्लेयर भी हो सकता है। सामने से आने वाली तेज रोशनी में ड्राइवर को कुछ समय के लिए सड़क, पैदल यात्री या दूसरे वाहन साफ दिखाई नहीं देते। खासकर दोपहिया चालकों के लिए इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है क्योंकि उनके पास कार की तरह सुरक्षा के लिए बॉडी स्ट्रक्चर नहीं होता। सरकार के प्रस्तावित बदलावों का फोकस इसलिए सिर्फ हेडलाइट को कम चमकीला करना नहीं बल्कि पूरे सड़क वातावरण में विजिबिलिटी बेहतर करना है।
कब से लागू होंगे नए नियम
अभी ये प्रस्तावित बदलाव हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित बदलावों को अगले अप्रैल से लागू करने की तैयारी है।
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